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प्रश्न
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 60 से 70 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:
एक मजदूर - दिन भर श्रम करना - बनिया की दुकान से रोज चावल खरीदना - बनिया द्वारा बचत की सलाह - मजदूर की उपेक्षा करना - बनिया द्वारा मजदूर के चावलों में से थोड़ा-थोड़ा चावल अलग करना - पंद्रह दिन बाद मजदूर के हाथ में दो किलो चावल - मजदूर आश्चर्यचकित - बनिया का बचत की बात बताना - मजदूर को बचत काँ महत्त्व समझना - सीख।
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:
एक मजदूर - दिन भर श्रम करना - बनिया की दुकान से रोज चावल खरीदना - बनिया द्वारा बचत की सलाह - मजदूर की उपेक्षा करना - बनिया द्वारा मजदूर के चावलों में से थोड़ा-थोड़ा चावल अलग करना - पंद्रह दिन बाद मजदूर के हाथ में दो किलो चावल देना - मजदूर आश्चर्यचकित होना - बनिया का बचत की बात बताना - मजदूर को बचत काँ महत्त्व समझना।
उत्तर
बचत का महत्त्व
कुरवंटा गाँव में एक मजदुर अपने परिवार के साथ रहता था। अपने परिवार का निर्वाह करने हेतु दिनभर दूसरों के खेतों में काम करता था। वह खेतों में बोहोत मेहनत करता था और उससे वो रोज बनिये की दुकान से चावल खरीदता था। रोज काम तो करता, परन्तु उससे आने वाले पैसों से वह पूरा पैसा खाने-पिने में ही लगा देता था।
एक दिन मजदुर हर रोज की तरह चावल खरीदने के लिए बनिये की दुकान पर आया और उसके पैसों से चावल खरीदा। उसी दिन बनिए ने मजदुर को बोला कि रोज जो चावल ले जाते हो उसी में से थोड़े-थोड़े चावल अलग करके रखा करो। थोड़े दिनों में अलग किये चावल को देखो, तुम्हारे पास इतने चावल इकट्ठे हुए होंगे कि तुम्हारे चार-पाँच दिन के चावल के पैसे बचे होंगे। और उसके जो पैसे बचे होंगे उससे तुम अपनी और अपने परिवार के जरूरतकों को पूरा कर सकते हों। परन्तु मजदूर को बनिए की सलाह अच्छी नहीं लगी। मजदूर ने उसकी सलाह की उपेक्षा करते हुए, बचत की बात को ठुकरा दिया।
उसके दूसरे दिन बनिया खुद ही मजदूर के चावलों में से थोड़ा -थोड़ा चावल अलग करके रखने लगा। दस दिन तक बनिया मजदुर के चावल थोड़े चावल अलग करके कुल देड़ किलो चावल जमा हुआ। वही चावल बनिए ने मजदुर को दिए। तब मजदूर ने ध्यान से देखा तो रोज के हिसाब से आज देड़ किलो चावल ज्यादा मिले। तब बनिये ने मजदुर को उस दिन की हुए बात को याद करवाया। बनिए ने कहा की दस दिनों के बचत से उसे देड़ किलो चावल मिलें।इससे तुम्हारे अगले दो दिनों के चावल के पैसे बच गए। बनिए की बात से मजदूर की आँखे खुल गई। उसी दिन से मजदूर ने भी बचत करने की ठान ली।
सीख - बचत करने से हम अपना लक्ष्य अवश्य पा सकते हैं।
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