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सब अँधियारा मिटि गया’ यहाँ किस अँधियारे की ओर संकेत किया गया है? यह अँधियारा कैसे दूर हुआ?
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कबीर की दृष्टि में संसार सुखी और वह स्वयं दुखी हैं, ऐसा क्यों?
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राम वियोगी की दशा कैसी हो जाती है? स्पष्ट कीजिए।
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निंदक के बारे में कबीर की राय समाज से पूरी तरह भिन्न थी। स्पष्ट कीजिए।
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कबीर की साखियाँ जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इनमें जिन जीवन-मूल्यों की झलक मिलती है, उनका उल्लेख कीजिए।
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ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभवों और मान्यताओं का वर्णन साखियों के आधार पर कीजिए।
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निंदक किसे कहा गया है? वह व्यक्ति के स्वभाव का परिष्करण किस तरह करता है?
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नीचे दिए गए वाक्य पढ़िए तथा ‘और’ शब्द के विभिन्न प्रयोगों पर ध्यान दीजिए-
- पास में सुंदर और शक्तिशाली युवक रहा करता था। (दो पदों को जोड़ना)
- वह कुछ और सोचने लगी। (‘अन्य’ के अर्थ में)
- एक आकृति कुछ साफ़ हुई… कुछ और … कुछ और… (क्रमशः धीरे-धीरे के अर्थ में)
- अचानक वामीरो कुछ सचेत हुई और घर की तरफ़ दौड़ गई। (दो उपवाक्यों को जोड़ने के अर्थ में)
- वामीरो का दुख उसे और गहरा कर रहा था। (‘अधिकता’ के अर्थ में)
- उसने थोड़ा और करीब जाकर पहचानने की चेष्टा की। (‘निकटता’ के अर्थ में)
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क्रिया का लिंग और वचन सामान्यतः कर्ता और कर्म के लिंग और वचन के अनुसार निर्धारित होता है। वाक्य में कर्ता और कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार जब क्रिया के लिंग, वचन आदि में परिवर्तन होता है तो उसे अन्विति कहते हैं।
क्रिया के लिंग, वचन में परिवर्तन तभी होता है जब कर्ता या कर्म परसर्ग रहित हों;
जैसे- सवार कारतूस माँग रहा था। (कर्ता के कारण)
सवार ने कारतूस माँगे। (कर्म के कारण)
कर्नल ने वज़ीर अली को नहीं पहचाना। (यहाँ क्रिया, कर्ता और कर्म किसी के भी कारण प्रभावित नहीं है)
अतः कर्ता और कर्म के परसर्ग सहित होने पर क्रिया कर्ता और कर्म से किसी के भी लिंग और वचन से प्रभावित नहीं होती और वह एकवचन पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है। नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-
- घोड़ा पानी पी रहा था।
- बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
- रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।
- देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।
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पाठ में आए ‘से’ के विभिन्न प्रयोगों से वाक्य की संरचना को समझिए।
(क) राजकपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया।
(ख) रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ।
(ग) फ़िल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिफ़ थे।
(घ) दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने के गणित जानने वाले की समझ से परे थी।
(ङ) शैलेंद्र राजकपूर की इस याराना दोस्ती से परिचित तो थे।
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इस पाठ में आए निम्नलिखित वाक्यों की संरचना पर ध्यान दीजिए-
(क) ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी।
(ख) उन्होंने ऐसी फ़िल्म बनाई थी जिसे सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था।
(ग) फ़िल्म कब आई, कब चली गई, मालूम ही नहीं पड़ा।
(घ) खालिस देहाती भुच्चे गाड़ीवान जो सिर्फ दिल की जुबान समझता है, दिमाग की नहीं।
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ध्यान दीजिए नुक्ता लगाने से शब्द के अर्थ में परिवर्तन हो जाता है। पाठ में दफा’ शब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ होता है-बार (गणना संबंधी), कानून संबंधी। यदि इस शब्द में नुक्ता लगा दिया जाए तो शब्द बनेगा ‘दफ़ा’ जिसका अर्थ होता है-दूर करना, हटाना। यहाँ नीचे कुछ नुक्तायुक्त और नुक्तारहित शब्द दिए जा रहे हैं उन्हें ध्यान से देखिए और अर्थगत अंतर को समझिए।
सजा – सज़ा
नाज – नाज़
जरा – ज़रा
तेज – तेज
निम्नलिखित वाक्यों में उचित शब्द भरकर वाक्य पूरे कीजिए-
- आजकल _________ बहुत खराब है। (जमाना/जमाना)
- पूरे कमरे को _________ दो। (सजा/सजा)
- _________ चीनी तो देना। (जरा/जरा)
- माँ दही _________ भूल गई। (जमाना/जमाना)
- दोषी को _________ दी गई। (सजा/सज़ा)
- महात्मा के चेहरे पर _________ था। (तेज/तेज़)
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नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए-
- मेरा एक भाई भी पुलिस में है।
- यह तो अति सुंदर ‘डॉगी’ है।
- कल ही मैंने बिलकुल इसी की तरह का एक कुत्ता उनके आँगन में देखा था।
वाक्य के रेखांकित अंश ‘निपात’ कहलाते हैं जो वाक्य के मुख्य अर्थ पर बल देते हैं। वाक्य में इनसे पता चलता है किस बात पर बल दिया जा रहा है और वाक्य क्या अर्थ दे रहा है। वाक्य में जो अव्यय किसी शब्द या पद के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष प्रकार का बल या भाव उत्पन्न करने में सहायता करते हैं उन्हें निपात कहते हैं; जैसे-ही, भी, तो, तक आदि।
ही, भी, तो, तक आदि निपातों का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए।
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'कर चले हम फ़िदा' कविता और 'कारतूस' एकांकी के भावों की तुलना कीजिए। विश्लेषण करते हुए अपने मत के समर्थन में तर्क प्रस्तुत कीजिए।
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कबीर और मीरा की भक्ति की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
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निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।
खेतों में भुट्टे की फसल देख, हर कोई कहता- कितनी बढ़िया है। दो-चार दिन में कटाई की तैयारी थी लेकिन .......
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निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।
आसमान में उड़ती पतंगें। देश को आजाद हुए 75 वर्ष हो गए। एक लंबा समय और हम अभी भी .........
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:
कबीर ने निंदक को पास रखने की सलाह क्यों दी है? क्या यह सलाह आपको उचित प्रतीत होती है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
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निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बोरा होइ।। |
- कबीरदास जी क्यों दुःखी हैं?
(a) ईश्वर से बिछुड़ने के कारण।
(b) ईश्वर को प्राप्त न कर सकने के कारण।
(c) विषय-वासनाओं में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
(d) ईश्वर भजन में लिप्त मनुष्यों को देखकर। - 'सोना' और 'जागना' क्रमशः किसके प्रतीकार्थ हैं?
(a) निद्रा और अनिद्रा के
(b) अंधकार और प्रकाश के
(c) अज्ञान और ज्ञान के
(d) दुःख और सुख के - किस व्यक्ति पर 'मंत्र' का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता?
(a) जिसका मन सांसारिक विषय-वासनाओं में लिप्त हो।
(b) जिसका मन अहंकार की भावना से भरा हो।
(c) जिसके मन में विरह रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
(d) जिसके मन में मिलन रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो। - कबीरदास जी के अनुसार 'बौरा' कौन है?
(a) जिसे प्रभु का साक्षात्कार हो गया है।
(b) जो प्रभु से विलग रहना चाहता है।
(c) जो प्रभु की दिन-रात सेवा कर रहा है।
(d) जो प्रभु के वियोग में जीवन व्यतीत कर रहा है। - 'मंत्र न लगना' का अर्थ हैः
(a) पीड़ित व्यक्ति का स्वस्थ न होना
(b) विष का प्रभाव कम न होना
(c) मंत्र सिद्ध न होना
(d) कोई उपाय काम न आना
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कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है?
- हमारा शरीर शीतल होता है।
- बोली में अहं का भाव आता है।
- हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है।
- सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।
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