CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) Syllabus - Free PDF Download
CBSE Syllabus 2025-26 Class 11 [कक्षा ११]: The CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) Syllabus for the examination year 2025-26 has been released by the Central Board of Secondary Education, CBSE. The board will hold the final examination at the end of the year following the annual assessment scheme, which has led to the release of the syllabus. The 2025-26 CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) Board Exam will entirely be based on the most recent syllabus. Therefore, students must thoroughly understand the new CBSE syllabus to prepare for their annual exam properly.
The detailed CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) Syllabus for 2025-26 is below.
CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) Revised Syllabus
CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) and their Unit wise marks distribution
CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) Course Structure 2025-26 With Marking Scheme
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Syllabus
CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) Syllabus for Chapter 1: वित्तीय लेखांकन भाग १
- लेखांकन - एक परिचय
- लेखांकन का अर्थ
- आर्थिक घटनाएं
- पहचान करना, मापना, लेखा-जोखा एवं सम्प्रेषण
- संगठन
- सूचना के इच्छुक उपयोगकर्त्ता
- लेखांकन एक सूचना के स्रोत के रूप में
- लेखांकन की गुणात्मक विशेषताएं
- लेखांकन के उद्देश्य
- व्यावसायिक लेन-देन का हिसाब रखना
- लाभ अथवा हानि की गणना
- वित्तीय स्थिति को प्रदर्शित करना
- उपयोगकर्त्ताओं को सूचनाएं उपलब्ध कराना
- लेखांकन की भूमिका
- लेखांकन के आधारभूत पारिभाषिक शब्द
- इकाई
- लेन-देन
- परिसंपत्तियाँ
- देयताएँ
- पूँजी
- विक्रय
- आगम
- व्यय
- खर्च
- लाभ
- अभिवृद्धि
- हानि
- बट्टा
- प्रमाणक
- माल
- क्रय
- आहरण
- स्टॉक
- देनदार
- लेनदार
- लेखांकन के सैध्दांतिक आधार का परिचय
- सामान्यत: मान्य लेखांकन सिद्धान्त
- आधारभूत लेखांकन संकल्पनाएं
- व्यावसायिक इकाई संकल्पना
- मुद्रा मापन संकल्पना
- सतत व्यापर संकल्पना
- लेखांकन अवधि संकल्पना
- लागत संकल्पना
- द्विपक्षीय संकल्पना
- आगम मान्यता संकल्पना
- आगम व्यय मिलान संकल्पना
- पूर्ण प्रस्तुतिकरण संकल्पना
- समनुरूपता की संकल्पना
- रूढ़िवादिता की संकल्पना
- सारता की संकल्पना
- वस्तुनिष्ठता की संकल्पना
- लेखांकन प्रणालियां
- लेखांकन के आधार
- लेखांकन मानक
- लेखांकन मानकों की आवश्यकता
- लेखांकन मानकों के लाभ
- लेखांकन मानकों की सीमाएँ
- लेखांकन मानकों की प्रयोज्यता
- आई.एफ.आर.एस. की आवश्यकता
- वस्तु एवं सेवा कर
- लेन - देनों का अभिलेखन - 1
- व्यावसायिक सौदे व स्रोत प्रलेख
- लेखांकन प्रमाणक की तैयारी
- लेखांकन समीकरण
- नाम व जमा का प्रयोग
- नाम व जमा के नियम
- प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तकें
- रोजनामचा
- खाता बही
- रोजनामचे व खाता बही में अंतर
- खातों का वर्गीकरण
- रोजनामचे से खतौनी
- लेन - देनों का अभिलेखन - 2
- रोकड़ बही
- एक स्तंभीय रोकड़ बही
- द्विस्तंभीय रोकड़ बही
- खुदरा रोकड़ बही
- रोकड़ बही का संतुलन
- क्रय (रोजनामचा) पुस्तक
- क्रय वापसी (रोजनामचा) पुस्तक
- विक्रय (रोजनामचा) पुस्तक
- विक्रय वापसी (रोजनामचा) पुस्तक
- मुख्य रोजनामचा
- खातों का संतुलन
- बैंक समाधान विवरण
- बैंक समाधान विवरण की आवश्यकता
- समय में अंतर
- अशुद्धियों के कारण अंतर
- बैंक समाधान विवरण का निर्माण
- रोकड़ बही में समायोजन के बिना बैंक समाधान विवरण बनाना
- समायोजन रोकड़ बही की सहायता से बैंक समाधान विवरण का निर्माण
- तलपट एवं अशुध्दियों का शोधन
- तलपट का अर्थ
- तलपट बनाने के उद्देश्य
- बही खातों की अंकगणितीय शुद्धता का निर्धारण
- अशुद्धियों को ज्ञात करने में सहायता करना
- वित्तीय विवरणों के निर्माण में सहायता करना
- तलपट को तैयार करना
- योग विधि
- शेष विधि
- शेष एवं योग विधि
- तलपट के मिलान का महत्त्व
- अशुद्धियों का वर्गीकरण
- लेख अशुद्धियां
- लोप अशुद्धियाँ
- सैध्दांतिक अशुद्धियाँ
- क्षतिपूरक अशुद्धियाँ
- अशुध्दियों को ज्ञात करना
- अशुद्धियों का संशोधन
- अशुद्धियाँ जो तलपट पर प्रभाव नहीं डालती हैं
- तलपट को प्रभावी करने वाली अशुद्धियाँ
- आगामी लेखांकन वर्ष में अशुद्धियों का शोधन
- ह्रास, प्रावधान और संचय
- ह्रास
- ह्रास का अर्थ
- ह्रास की विशेषताएँ
- ह्रास एवं इसमें मेल खाते शब्द
- रिक्तीकरण
- परिशोधन
- ह्रास के कारण
- क्षय एवं घिसावट अथवा समय की समाप्ति के कारण मूल्य में कमी
- कानूनी अधिकार की समाप्ति
- अप्रचलन
- असमान्य तत्व
- ह्रास की आवश्यकता
- आगम एवं लागत का मिलान
- कर के लिए महत्त्व
- सत्य एवं उचित वित्तीय स्थिति
- कानून का अनुपालन
- ह्रास की राशि को प्रभावित करने वाले तत्व
- परिसम्पत्ति की लागत
- अनुमानित शुद्ध अवशिष्ट मूल्य
- ह्रास मान मूल्य
- अनुमानित उपयोगी जीवनकाल
- ह्रास की राशि की गणना की पद्धतियाँ
- सीधी रेखा पद्धति
- सीधी रेखा विधि के लाभ
- सीधी रेखा विधि की सीमाएं
- क्रमागत पद्धति
- क्रमागत पद्धति के लाभ
- क्रमागत ह्रास विधि की सीमाएं
- सीधी रेखा एवं क्रमागत ह्रासविधि तुलनात्मक विश्लेषण
- ह्रास लगाने के आधार
- ह्रास का वार्षिक प्रभार
- ह्रास एवं मरम्मत व्यय का लाभ-हानि खाते पर भार
- आयकर कानून मान्यता
- उपयुक्तता
- ह्रास के अभिलेखन की पद्धतियां
- परिसम्पति खाते पर ह्रास का लगाना जाना
- ह्रास पर प्रावधान खाता/संचित ह्रास खाता
- परिसम्पत्ति का निपटान/विक्रय
- परिसम्पत्ति निपटान खाते की उपयोगिता
- वर्तमान परिसम्पति में बढ़ोत्तरी एवं विस्तार
- प्रावधान
- प्रावधानों का लेखांकन
- संचय
- संचय एवं प्रावधान में अंतर
- संचय के प्रकार
- आयगत एवं पूँजीगत संचय में अन्तर आयगत एवं पूँजीगत
- संचयों में निम्न के आधार पर अन्तर किया जा सकता है
- संचय का महत्व
- गुप्त संचय
- विनिमय विपत्र
- विनिमय विपत्र की परिभाषा
- विनिमय विपत्र के पक्षकार
- प्रतिज्ञा पत्र
- प्रतिज्ञा पत्र के पक्षकार
- विनिमय विपत्र के लाभ
- विपत्र की परिपक्वता
- आहर्ता/बिलकर्त्ता की पुस्तक में प्रविष्टियाँ
- स्वीकारकर्त्ता/प्रतिज्ञाकर्त्ता की पुस्तक
- विपत्र को बट्टागत (भुनाना) कराना
- विनिमय विपत्र का बेचना
- लेखांकन व्यवहार
- विनिमय विपत्र का अनादरण
- निकराई व्यय
- विपत्र का नवीनीकरण
- विनिमय विपत्र का परिपक्वता तिथि से पूर्व भुगतान
CBSE Class 11 [कक्षा ११] Accountancy (लेखाशास्त्र) Syllabus for Chapter 2: वित्तीय लेखांकन भाग २
- पणधारी और उनकी सूचना आवश्यकतायें
- पूँजी और आगम के मध्य भेद
- पूँजीगत व्यय
- प्राप्ति
- पूँजी व आगम के मध्य अन्तर की महत्ता
- वित्तीय विवरण
- व्यापारिक व लाभ और हानि खाता
- व्यापारिक व लाभ और हानि खाते के प्रासंगिक तत्व
- अंतिम प्रविष्टियाँ
- सकल लाभ व निवल लाभ की अवधारणा
- बेचे गये समान की लागत और अंतिम स्टॉक का व्यापारिक खाते में पुनः निरीक्षण
- प्रचालन लाभ
- तुलन पत्र
- तुलन पत्र का निर्माण
- तुलन पत्र की प्रासंगिक मदें
- परिसंपत्तियों और दायित्वों का क्रमबद्धीकरण और समूहीकरण
- प्रारंभिक प्रविष्ट
- समायोजन की आवश्यकता
- समायोजन का प्रभाव - अंतिम स्टॉक
- समायोजन का प्रभाव - बकाया व्यय
- समायोजन का प्रभाव - पूर्वदत्त व्यय
- समायोजन का प्रभाव - उपार्जित आय
- समायोजन का प्रभाव - अग्रिम प्राप्त आय
- समायोजन का प्रभाव - ह्रास
- समायोजन का प्रभाव - डूबत ऋण
- समायोजन का प्रभाव - संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान
- समायोजन का प्रभाव - देनदारों पर बट्टे का प्रावधान
- समायोजन का प्रभाव - प्रबंधक कमीशन
- समायोजन का प्रभाव - पूँजी पर ब्याज
- अपूर्ण अभिलेखों का अर्थ
- अपूर्ण अभिलेखों की विशेषताएं
- अपूर्णता के कारण और सीमायें
- लाभ व हानि का निर्धारण
- अवस्था विवरण का निर्माण
- अवस्था विवरण एवं तुलन-पत्र में अन्तर
- व्यापर एवं लाभ-हानि खाता तथा तुलन-पत्र तैयार करना
- उधार क्रय निर्धारण
- उधार विक्रय का निर्धारण
- प्राप्य विपत्र व देय विपत्र का निर्धारण
- रोकड़ पुस्तक के सारांश द्वारा अनुपलब्ध सूचनाओं का निर्धारण
- कंप्यूटर प्रणाली का अर्थ एवं तत्त्व
- यंत्र सामग्री हार्डवेयर
- प्रक्रिया सामग्री (सॉफ्टवेयर)
- उपयोगकर्त्ता
- क्रियाविधियाँ
- डाटा
- संयुक्तिकरण
- कंप्यूटर प्रणाली की क्षमतायें
- गति
- परिशुद्धता
- विश्वसनीयता
- बहुआयामी
- संचयन
- कंप्यूटर प्रणाली की सीमाएं
- सामान्य चेतना का अभाव
- शून्य आई.क्यू.
- निर्णय लेने में असमर्थ
- कंप्यूटर के अंग
- निवेश एकक
- केन्द्रीय प्रक्रम एकक
- निर्गम एकक
- कंप्यूटरीकृत लेखांकन का उद्भव
- सूचना एवं निर्णय
- लेन-देन प्रक्रम संसाधन प्रणाली
- कंप्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की विशेषता
- प्रबंधन सूचना प्रणाली व लेखांकन सूचना प्रणाली
- लेखांकन प्रतिवेदन का प्रारूप
- सूचना प्रणाली में डाटा इंटरफेस
- कंप्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली की परिकल्पना
- मानवीय व कंप्यूटरीकृत लेखांकन के मध्य तुलना
- कंप्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली से लाभ
- कंप्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली की सीमायें
- लेखांकन सॉफ्टवेयर के स्रोत
- लेखांकन सॉफ्टवेयर के स्रोत
- लेखांकन पैकेज
- प्रयोग के लिए तैयार पैकेज
- उपभोगतानुरूप पैकेज
- उपयुक्त
- लेखांकन सॉफ्टवेयर के स्रोतों, मुख्य दस्तावेज से पहले सामान्य विचार
- लचीलापन
- संस्थापन तथा देखभाल की लागत
- संगठन का आकार
- सरलता से समायोजित तथा प्रशिक्षण की आवश्यकता
- उपयोगिता
- आपेक्षित गोपनीयता का स्तर (सॉफ्टवेयर व डाटा)
- आयत/निर्यात डाटा सुविधा
- विक्रेताओं के नाम व योग्यता