Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 2 - Geometry [गणित २ - ज्यामिति] Syllabus - Free PDF Download
Maharashtra State Board Syllabus 2025-26 9th Standard [९ वीं कक्षा]: The Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 2 - Geometry [गणित २ - ज्यामिति] Syllabus for the examination year 2025-26 has been released by the MSBSHSE, Maharashtra State Board. The board will hold the final examination at the end of the year following the annual assessment scheme, which has led to the release of the syllabus. The 2025-26 Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 2 - Geometry [गणित २ - ज्यामिति] Board Exam will entirely be based on the most recent syllabus. Therefore, students must thoroughly understand the new Maharashtra State Board syllabus to prepare for their annual exam properly.
The detailed Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 2 - Geometry [गणित २ - ज्यामिति] Syllabus for 2025-26 is below.
Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 2 - Geometry [गणित २ - ज्यामिति] Revised Syllabus
Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 2 - Geometry [गणित २ - ज्यामिति] and their Unit wise marks distribution
Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 2 - Geometry [गणित २ - ज्यामिति] Course Structure 2025-26 With Marking Scheme
# | Unit/Topic | Weightage |
---|---|---|
1 | भूमिति के मूलभूत संबोध | |
2 | समांतर रेखाएँ | |
3 | त्रिभुज | |
4 | त्रिभुजों की रचनाएँ | |
5 | चतुर्भुज | |
6 | वृत्त | |
7 | निर्देशांक भूमिति | |
8 | त्रिकोणमिति | |
9 | पृष्ठफल तथा घनफल | |
Total | - |
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Syllabus
- भूमिति के मूलभूत संबोध का परिचय
- बिंदु
- रेखा
- बिंदु की रेखा से दूरी
- प्रतल
- बिंदुओं के निर्देशांक तथा दूरी
- मध्यता
- रेषाखंड
- रेखाखंड
- सर्वांगसम रेखाखंड
- रेखाखंडों की सर्वांगसमता के गुणधर्म
- रेखाखंड का मध्यबिंदु
- रेखाखंडों की तुलना
- रेखाखंडों की या किरणों की लंबता
- किरण
- सशर्त कथन और विलोम
- उपपत्ति
- समांतर रेखाएँ
- समांतर रेखाओं की जाँच
- समांतर रेखाओं की तिर्यक छेदी रेखा
- समांतर रेखाओं के गुणधर्म
- अंतःकोणों का प्रमेय
- प्रमेय: दो समांतर रेखाओं को किसी तिर्यक रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित करने पर तिर्यक रेखा के एक ही ओर स्थित अंतःकोण परस्पर संपूरक होते हैं ।
- संगत कोणों के गुणधर्म
- प्रमेय: दो समांतर रेखाओं को किसी तिर्यक रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित करने पर निर्मित संगत कोणों के माप समान होते हैं ।
- एकांतर कोणों के गुणधर्म
- प्रमेय: दो समांतर रेखाओं को किसी तिर्यक रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित करने पर निर्मित एकांतर कोणों के माप समान होते हैं।
- अंतःकोणों का प्रमेय
- समांतर रेखाओं के गुणधर्मों का उपयोग
- समांतर रेखाओं की कसौटियाँ
- समांतर रेखाओं की अंतःकोण कसौटी
- प्रमेय: दो भिन्न रेखाओं को किसी तिर्यक रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित करने पर उसकी तिर्यक रेखा के एक ही ओर बने अंतःकोणों का योगफल 180° हो तो वे रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैं।
- एकांतर कोण कसौटी
- प्रमेय: दो रेखाओं को किसी तिर्यक रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित करने पर बने एकांतर कोणों की एक जोड़ी सर्वांगसम हो तो वे रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैं।
- संगत कोण कसौटी
- प्रमेय: दो रेखाओं को किसी तिर्यक रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित करने पर बनने वाले संगत कोणों की एक जोड़ी सर्वांगसम हो तो वे रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैं।
- समांतर रेखाओं की अंतःकोण कसौटी
- समांतर रेखाओं के उपप्रमेय
- उपप्रमेय I: यदि कोई रेखा उसी प्रतल की अन्य दो रेखाओं पर लंब हो तो वे दो रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैं।
- उपप्रमेय II: किसी भी प्रतल में दो रेखाएँ उसी प्रतल की तीसरी रेखा के समांतर हों तो वे रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैं।
- त्रिभुज - भुजाएँ, कोण, शीर्ष, अभ्यंतर और बहिर्भाग त्रिभुज क्षेत्र
- त्रिभुज के दूरस्थ अंतःकोणों का प्रमेय
- प्रमेय: त्रिभुज के बहिष्कोण का माप उसके दूरस्थ अंतःकोणों के मापों के योगफल के बराबर होता है।
- त्रिभुज के बहिष्कोण के प्रमेय का गुणधर्म
- त्रिभुज का बहिष्कोण का माप उसके प्रत्येक दूरस्थ अंतःकोण से बड़ा होता है।
- त्रिभुज के बहिष्कोणों के मापों का योगफल 360° होता है।
- त्रिभुजों की सर्वांगसमता
- समद्विबाहु त्रिभुज का प्रमेय
- प्रमेय: यदि त्रिभुज की दो भुजाएँ सर्वांगसम होती उन भुजाओं के सम्मुख के कोण भी सर्वांगसम होते हैं।
- समद्विबाहु त्रिभुज के प्रमेय का विलोम
- प्रमेय: यदि त्रिभुज के दो कोण सर्वांगसम हो तो उन कोणों की सम्मुख भुजाएँ भी सर्वांगसम होती हैं।
- त्रिभुज का उपप्रमेय
- उपप्रमेय: त्रिभुज के तीनों कोण सर्वांगसम हो तो उसकी तीनों भुजाएँ भी सर्वांगसम होती हैं।
- 30°-60°-90° माप वाले त्रिभुज का गुणधर्म
- प्रमेय : यदि किसी समकोण त्रिभुज के न्यूनकोण 30° तथा 60° हों तो 30° मापवाले कोण की सम्मुख भुजा की लंबाई कर्ण की लंबाई के आधी तथा 60° मापवाले कोण की सम्मुख भुजा की लंबाई कर्ण की लंबाई का `(sqrt(3))/2` गुना होती है ।
- 45°-45°-90° माप वाले त्रिभुज का गुणधर्म
- प्रमेय: यदि किसी समकोण त्रिभुज के न्यून कोणों के माप 45° तथा 45° हों तो समकोण को समाविष्ट करनेवाली प्रत्येक भुजा की लंबाई कर्ण की लंबाई का `1/sqrt2` गुना होती है ।
- त्रिभुज की माध्यिकाएँ
- समकोण त्रिभुज मे कर्ण पर खींची गई माध्यिका का गुणधर्म
- प्रमेय: समकोण त्रिभुज में कर्ण पर खींची गई माध्यिका कर्ण की आधी होती है।
- लंबसमद्विभाजक का प्रमेय
- रेखाखंड के लंबसमद्विभाजक पर स्थित प्रत्येक बिंदु उस रेखाखंड के अंतःबिंदुओं से समान दूरी पर होता है।
- रेखाखंड के अंतःबिंदुओं से समदूरस्थ कोई भी बिंदु उस रेखाखंड के लंबसमद्विभजक पर होता है।
- त्रिभुज के कोण समद्विभाजक का प्रमेय
- प्रमेय: किसी त्रिभुज में कोण का समद्विभाजक, कोण की सम्मुख भुजा को अन्य भुजाओं की लंबाइयों के अनुपात में विभाजित करता है।
- त्रिभुज की भुजाओं तथा कोणों में असमानता का गुणधर्म
- प्रमेय: यदि त्रिभुज की दो भुजाओं में एक भुजा दूसरी से बड़ी हो तो बड़ी भुजा का सम्मुख कोण छोटी भुजा के सम्मुख कोण से बड़ा होता है।
- प्रमेय: त्रिभुज के दो कोणों के माप असमान हो तो बड़े कोण की सम्मुख भुजा छोटे कोण की सम्मुख भुजा से बड़ी होती है।
- प्रमेय: त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं की लंबाइयों का योगफल तीसरी भुजा की लंबाई सेअधिक होता है।
- समरूप त्रिभुज
- त्रिभुजों की समरूपता
- लंबसमद्विभाजक का प्रमेय
- रेखाखंड के लंबसमद्विभाजक पर स्थित प्रत्येक बिंदु उस रेखाखंड के अंतःबिंदुओं से समान दूरी पर होता है।
- रेखाखंड के अंतःबिंदुओं से समदूरस्थ कोई भी बिंदु उस रेखाखंड के लंबसमद्विभजक पर होता है।
- त्रिभुजों की रचना
- ऐसे त्रिभुज की रचना करना जिसका आधार, अन्य दो भुजाओं की लंबाइयों का योगफल तथा आधार का कोई एक कोण दिया हो।
- त्रिभुज का आधार तथा शेष दो भुजाओं की लंबाइयों का अंतर और आधार का एक कोण दिया गया हो तो त्रिभुज की रचना करना ।
- त्रिभुज की रचना करना जिसकी परिमिति तथा आधार के दोनों कोणों के माप दिए गए हों।
- चतुर्भुज - भुजाएँ, आसन्न भुजाएँ, सम्मुख भुजाएँ, सम्मुख कोण, आसन्न कोण और विपरीत कोण
- चतुर्भुज के प्रकार
- समांतर चतुर्भुज के गुणधर्म
- आयत के गुणधर्म
- समचतुर्भुज के गुणधर्म
- वर्ग के गुणधर्म
- समलंब के गुणधर्म
- समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज के गुणधर्म
- समांतर चतुर्भुज के गुणधर्म
- गुणधर्म - समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ सर्वांगसम होते हैं ।
- गुणधर्म - समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। (अवश्य ही उनके प्रतिच्छेदी बिंदु पर।)
- गुणधर्म - समांतर चतुर्भुज के सम्मुख कोण सर्वांगसम होते हैं।
- गुणधर्म - समांतर चतुर्भुज के आसन्न कोण संपूरक होते हैं।
- समांतर रेखाओं की कसौटियाँ
- प्रमेय - चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं की जोड़ियाँ सर्वांगसम हो तो वह चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज होता है ।
- प्रमेय - यदि एक चतुर्भुज में सम्मुख कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर हो, तो वह समांतर चतुर्भुज होता है।
- प्रमेय - यदि एक चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करें, तो वह एक समांतर चतुर्भुज होता है।
- प्रमेय - किसी चतुर्भुज के सम्मुख भुजाओं की एक जोड़ी सर्वांगसम तथा समांतर हो तो वह चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज होता है ।
- आयत के गुणधर्म
- गुणधर्म - आयत के विकर्ण बराबर लंबाई के होते हैं।
- वर्ग के गुणधर्म
- गुणधर्म - वर्ग के विकर्ण परस्पर सर्वांगसम होते हैं ।
- गुणधर्म - वर्ग के विकर्ण एक दूसरे को समकोण पर समद्विभाजक करते हैं।
- समचतुर्भुज के गुणधर्म
- गुणधर्म - एक समचतुर्भुज के विकर्ण परस्पर लंब समद्विभाजक होते हैं।
- गुणधर्म - समचतुर्भुज के विकर्ण सम्मुख कोणों को समद्विभाजित करते हैं ।
- त्रिभुज की दो भुजाओं के मध्यबिंदुओं का प्रमेय
- त्रिभुज की दो भुजाओं के मध्यबिंदुओं के प्रमेय का विलोम
- वृत्त - केंद्र, त्रिज्या, व्यास, जीवा, त्रिज्यखंड, वृत्तखंड, अर्धवृत्त, परिधि, चाप, अभ्यंतर और बहिर्भाग, संकेंद्रित वृत्त
- वृत्त की जीवा के गुणधर्म
- प्रमेय - वृत्त के केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब उस जीवा को समद्विभाजित करता है।
- प्रमेय - वृत्त केंद्र तथा जीवा के मध्यबिंदु को जोड़ने वाला रेखाखंड जीवा पर लंब होता है।
- वृत्त की सर्वांगसम जीवाओं तथा उनके केंद्र से दूरी संबंधी गुणधर्म
- सर्वांगसम जीवाओं के गुणधर्म
- प्रमेय - एक ही वृत्त की सर्वांगसम जीवाएँ केंद से समदूरस्थ होती हैं।
- प्रमेय - एक ही वृत्त की केंद्र से समदूरस्थ जीवाएँ सर्वांगसम होती हैं।
- त्रिभुज का अंतर्वृत्त
- त्रिभुज के अंतर्वृत्त की रचना करना
- त्रिभुज का परिवृत्त
- त्रिभुज के परिवृत्त की रचना करना
- निर्देशांक ज्यामिति
- प्रतल के बिंदु के निर्देशांक
- अक्ष पर स्थित बिंदुओं के निर्देशांक
- दिए गए निर्देशांकों से संबंधित बिंदु प्रतल में स्थापित करना
- X-अक्ष और Y-अक्ष के समांतर रेखाओं के समीकरणे.
- रेखीय समीकरण का आलेख
- सामान्य स्वरूप में रेखीय समीकरण का आलेख
- त्रिकोणमिति
- त्रिभुज के संदर्भ में कुछ संबोध
- त्रिकोणमितीय अनुपात
- त्रिकोणमितीय अनुपातों में संबंध
- 30° तथा 60° मापवाले कोणों का त्रिकोणमितीय अनुपात
- त्रिकोणमिति तालिका
- त्रिकोणमितीय के महत्त्वपूर्ण समीकरण
- घनाभ पृष्ठफल
- ऊर्ध्वाधर पृष्ठों का पृष्ठफल = 2h ( l + b )
- संपूर्ण पृष्ठफल = 2 (lb + bh + hl )
- घनाभ का घनफल
- घनाभ का घनफल = l × b × h
- घन का पृष्ठफल
- समघन का संपूर्ण पृष्ठफल = 6l2
- समघन का उर्ध्वाधर पृष्ठफल = 4l2
- घन का आयतन
- समघन का घनफल = l3
- लंबवृत्ताकार बेलन पृष्ठफल
- लंबवृत्ताकार बेलन का वक्र पृष्ठफल = 2πrh
- लंबवृत्ताकार बेलन का संपूर्ण पृष्ठफल = 2πr ( r + h )
- लंबवृत्ताकार बेलन का घनफल
- लंबवृत्ताकार बेलन का घनफल = πr2h
- शंकु की अवधारणा
- शंकु से संबंधित पद और उनका परस्पर संबंध
- शंकु पृष्ठफल
- शंकु की तिरछी ऊँचाई (l) =`sqrt(h^2 + r^2)`
- शंकु का वक्रपृष्ठफल = πrl
- शंकु का संपूर्ण पृष्ठफल = πr (r + l)
- शंकु का घनफल
- शंकु का घनफल = `1/3`x πr2h
- गोले का पृष्ठफल
- गोले का पृष्ठफल = 4πr2
- अर्धगोले का वक्र पृष्ठफल = 2πr2
- ठोस अर्धगोले का संपूर्ण पृष्ठफल = 3πr2
- गोले का घनफल
- गोले का घनफल = `4/3`πr3
- अर्धगोले का घनफल = `2/3`πr3