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एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में दीर्घकाले के लिए किसी फर्म का संतुलन शून्य लाभ पर होने का क्या कारण है? - Economics (अर्थशास्त्र)

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प्रश्न

एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में दीर्घकाले के लिए किसी फर्म का संतुलन शून्य लाभ पर होने का क्या कारण है?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाजार में नये फर्मों का निर्बाध रूप से प्रवेश होता है। यदि उद्योग में फर्म अल्पकाल में धनात्मक लाभ प्राप्त कर रहा हो तो इससे नई फर्ने उद्योग में प्रवेश के लिए आकर्षित होंगी और यह तब तक होगा जब तक लाभ शून्य न हो जायें। इसके विपरीत, यदि अल्पकाल में फर्मों को घाटा हो रहा हो, तो कुछ फर्मे उत्पादन कर देंगी और फर्मों का बाजार से बहिर्गमन होगा। पूर्ति में कमी के कारण संतुलन कीमत बढ़ेगी और यह तब तक होगा जब तक लाभ शून्य न हो जाये।

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अध्याय 6: प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार - अभ्यास [पृष्ठ ११६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Economics - Introductory Microeconomics [English] Class 11
अध्याय 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार
अभ्यास | Q 10. | पृष्ठ ११६
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