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आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे? - History (इतिहास)

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प्रश्न

आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे?

दीर्घउत्तर

उत्तर

सुमेरियाई लोग बहु-देवतावादी थे। प्रत्येक ग्राम का और प्रत्येक शहर का अपना देवता होता था। नि:संदेह उनके देवी-देवताओं की संख्या विशाल थी और उनमें से अधिकांशतः प्रकृति की शक्तियों के प्रतिनिधि थे। उदाहरण के लिए, इन्नाना-प्रेम और युद्ध की देवी थी, तो ‘उर’ चंद्र देवता था। ये सुमेर के लोकप्रिय देवी-देवता थे। इसके अतिरिक्त एनलिल सुमेर में पूजे जाने वाले देवताओं में सर्वप्रमुख था। इस देवता को मानवता का स्वामी और राजाओं का राजा माना जाता था। विभिन्न देवी-देवताओं के निवास के लिए बनाया गया मंदिर उनके घर होते थे।

प्रारंभ में मंदिरों का निर्माण विशेष योजना के आधार पर किया जाता था। मंदिर का केंद्रीय कक्ष देवी-देवता के प्रतिमा कक्ष से जुड़ा होता था। इसके अतिरिक्त मंदिरों के दोनों तरफ़ गलियारा होता था। परंतु बाद के काल में मंदिरों का निर्माण घर की योजनानुसार होने लगा। इसके अंतर्गत एक खुले आँगन के चारों ओर अनेक कमरे बनाए जाते थे। देवी-देवता की मूर्ति के दर्शन सीधे नहीं होते थे। वहाँ तक पहुँचने के लिए आँगनों, बाहरी कक्षों और तिरछे अक्षों से होकर गुजरना पड़ता था। इसके अतिरिक्त सभी मंदिर एक जैसे बने होते थे। अतः वे घर जैसे दिखते थे।

इसमें कोई शक नहीं है कि मंदिर मानव जीवन से जुड़ी लगभग सभी गतिविधियों के केंद्रबिंदु थे। इतिहास गवाह है कि सुमेरिया के नगर राज्यों पर ऐसे सरदारों अथवा राजाओं ने शासन किया, जो पुजारी भी थे। संदर्भित काल में राजस्व पुजारियों के कामकाज से जुड़ा हुआ था। इसका अर्थ यह है कि एक ही व्यक्ति पुजारी एवं शासक दोनों रूपों में कार्य करता था। इस प्रकार मंदिर पूजा-स्थल के साथ-साथ प्रमुख पुजारी और शासक का निवास-स्थल भी था।

इसके अतिरिक्त, मंदिर सार्वजनिक जीवन का केंद्रबिंदु भी था। सार्वजनिक जीवन से संबंधित कार्यों का मार्गदर्शन मंदिर से ही किया जाता था। मंदिर में गोदाम, कारखाने तथा कारीगरों के बड़े-बड़े निवास सम्मिलित थे। मंदिर व्यवस्थापक,व्यापारियों के नियोक्ता, आवंटन और वितरण के लिखित अभिलेखों के पालक आदि के रूप में भी कार्य करता था। इन्हीं मंदिरों में जादू-टोने से बीमारियाँ ठीक की जाती थीं। इसी स्थान पर लिखाई-पढ़ाई का कार्य संपन्न होता था। साथ-साथ ज्योतिष जानने वाले इसे प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करते थे। इस प्रकार मंदिर धार्मिक जीवन और सामाजिक जीवन के केंद्रबिंदु होने के कारण आकार-प्रकार और क्रियाकलाप के दृष्टिकोण से घर जैसे ही होते थे।

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दक्षिणी मेसोपोटामिया का शहरीकरण - मंदिर और राजा
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अध्याय 2: लेखन कला और शहरी जीवन - अभ्यास [पृष्ठ ४८]

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एनसीईआरटी History [Hindi] Class 11
अध्याय 2 लेखन कला और शहरी जीवन
अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ ४८
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