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प्रश्न
आप अंश से क्या समझते हैं? कंपनी अधिनियम 2013 संशोधित के अनुसार अंशों की श्रेणियों को स्पष्ट करें।
दीर्घउत्तर
उत्तर
अंश, उस इकाई से संबंध रखते हैं, जिसमें कंपनी की कुल पूँजी बंटी होती है। इसलिए एक अंश, कंपनी की अंशपूँजी का वह भाग है जो कि कंपनी के स्वामित्व में हित रखने के आधार तैयार करता है। व्यक्ति, जो कि अंशों के द्वारा राशि का योगदान देते हैं कंपनी के 'अंशधारी' कहलाते हैं।
अधिकृत पूँजी की राशि, अंशों की संख्या के साथ जिसमें की वह विभाजित है, सीमा पार्षद नियम दर्शाए जाते हैं, लेकिन अंशों की श्रेणियाँ जिसमें कि कंपनी की पूँजी विभाजित है, उसके अधिकार एवं कर्तव्यों के साथ, कंपनी के अंतर्नियमों में निर्धारित होते हैं। कंपनी अधिनियम के अनुसार एक कंपनी दो प्रकार के अंशों का निर्गमन कर सकती है-
- पृर्वाधिकारी/अधिमानी अंश;
- समता अंश (सामान्य अंश भी कहलाते हैं)
- अधिमानी अंश - कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 43 के अंतगत, एक अधिमान अंश वह होता है, जो कि दी गई शर्तों की पूर्ति करता है।
- अधिमानी अंशधारियों को एक निश्चित राशि का लाभांश पाने का अथवा प्रत्येक अंश के अंकित मूल्य पर निश्चित दर से परिकलित किए गए लाभांश पाने, समता अंशधारियों को लाभांश भुगतान से पूर्व, का अधिकार होता है।
- पूँजी के संबंध में यह कंपनी के समापन पर इस अंश की पूँजी वापस प्राप्त करने का अधिकार समता अंश से पूर्व होता है।
- समता अंश - कंपनी अधिनियम की 2013 की धारा 43 के अनुसार एक समता अंश, वह अंश है जो अधिमान अंश नहीं हैं। दूसरे शब्दों में वह अंश जो कि लाभांश के भुगतान या पूँजी के पुनः भुगतान के संबंध में कोई अधिकार नहीं रखता 'समता अंश' कहलाता है। समता अंशधारी, कंपनी के लाभों में से उनका भाग, अधिमान अंशघारकों को लाभांश के अधिकार के पश्चात् लेने के अधिकारी होते हैं। समता अंशों पर लाभांश निश्चित नहीं है, यह वर्ष प्रतिवर्ष बदलता रहता है, जो कि उपलब्ध लाभ में से वितरण की राशि पर निर्भर करता है।
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अशों की श्रेणियाँ एवं प्रकृति
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