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प्रश्न
आत्मा क्या है? आत्मा की भारतीय अवधारणा पाश्चत्य अवधारणा से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर
भारतीय संस्कृति संदर्भ में आत्मा का विश्लेषण अनेक महत्वपूर्ण पक्षों को स्पष्ट करता है जो पश्चत सांस्कृतिक संदर्भ में पाए जाने वाले पक्षों से भिन्न होता है भारतीय और पाश्चत्य अवधारणाोओ के मध्य एक महत्वपूर्ण अंतर् इस तथ्य को लेकर है की आत्मा और दूसरे अन्य के बिच किसी प्रकार से सिमा रेखा निर्धरित की गई है पश्चत अवधरणा में यह सिमा रेखा अपेक्षाकृत स्थिर और दृढ़ प्रतीत होता है दूसरी तरफ भारतीय अवधारणा में आत्मा और अन्य सब कुछ को अपने में अंतनिर्हित करता हुआ ब्रह्माण्ड में विलीन होता हुआ प्रतीत होता है किन्तु दूसरे क्षण में आत्मा अन्य सबसे पूर्णतया विनिवर्तित होकर व्यक्तिगत हाथ में (उदाहरणार्थ हमारी व्यक्तिगत आवश्यकताए एव लक्ष्य) पर केंद्रित होता हुआ प्रतित होता है पाश्चत्य अवधारणा आत्मा और अन्य मनुष्य और प्रकृति तथा आत्मनिष्ठा और वस्तुनिष्ठ के मध्य स्पष्ट द्विभाजन करती हुई प्रतीत होती है
पाश्चत्य संस्कृति में आत्मा और समूह को स्पष्ट रूप में परिभाषित सिमा रेखाओ के साथ दो भिन्न इकाइयों के रूप में स्वीकार किया गया है व्यक्ति समूह का सदस्य होते हुए भी अपनी व्यक्ति का बनाए रखता है भारतीय संस्कृति में आत्मा को व्यक्ति के अपने समूह से पृथक नहीं किया जा सकता है बल्कि दोनों सामंजस्य पूर्ण सहअस्तित्व के साथ बने रकते है दूसरी तरफ पाश्चत्य संस्कृति में दोनों के बिच एक दुरी बानी रहती है यही कारण है की अनेक पाश्चात्य संस्कृतियों का प्रतिवादी और अनेक एशियाई संस्कृतियों का समूहिकतावादी संस्कृति के रूप में विशेषीकरण किया जाता है