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प्रश्न
परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
अध्यापक: | हाँ हाँ, क्यों नहीं? हिंदी में ‘पल्लवन’ शब्द अंग्रेज़ी ‘Expansion’ शब्द के प्रतिशब्द के रूप में आता है। ‘पल्लवन’ का अर्थ है- विस्तार अथवा फैलाव। यह संक्षेपण का विरुद्धार्थी शब्द है। जब किसी शब्द, सूक्ति, उद्धरण, लोकोक्ति, गद्य, काव्य पंक्ति आदि का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसका दृष्टांतों, उदाहरणों अथवा काल्पनिक उड़ानों द्वारा २००-३०० शब्दों में विस्तार करते हैं तो उसे ‘पल्लवन’ कहते हैं। अर्थात् विषय का विस्तार करना ‘पल्लवन’ है। |
रिदिम: | तो क्या पल्लवन का मतलब सिर्फ विषय का विस्तार करना है? |
अध्यापक: | नहीं-नहीं , सिर्फ विस्तार नहीं! उसकी और भी कुछ विशेषताएँ और नियम होते हैं। |
गौरांश: | मैं कुछ समझा नहीं? |
अध्यापक: | आइए, मैं समझाता हूँ। हर हर भाषा में कुछ ऐसे लेखक होते हैं जो अपने विचारों को सूक्ष्म और संक्षिप्त रूप में रखते हैं। उन्हें समझ पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे समय में पल्लवन के माध्यम से उसे समझाया जा सकता है। |
रोशन: | तो क्या पल्लवन से तात्पर्य ‘निबंध’ है? |
अध्यापक: | नहीं! कई लोग निबंध और पल्लवन को एक मानने की गलती करते हैं। वास्तव में इन दोनों में अंतर है। निबंध में किसी एक विचार को विस्तार से लिखने के लिए कल्पना, प्रतिभा और मौलिकता का आधार लिया जाता है। पल्लवन में भी विषय का विस्तार होता है परंतु पल्लवन में विषय का विस्तार एक निश्चित सीमा के अंतर्गत किया जाता है। |
- कृति पूर्ण कीजिए: (२)
- पल्लवन के लिए अंग्रेज़ी शब्द − .............
- पल्लवन का अर्थ − .............
- पल्लवन का विरुद्धार्थी शब्द − .............
- विषय का विस्तार करना − .............
- विलोम शब्द लिखिए (२)
- विस्तार × ______
- अनिश्चित × ______
- विचार × ______
- कठिन × ______
- ‘पढ़ना जरूरी है’ इस कथन के बारे में अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
आकलन
उत्तर
- पल्लवन के लिए अंग्रेज़ी शब्द − Expansion
- पल्लवन का अर्थ − विस्तार अथवा फैलाव
- पल्लवन का विरुद्धार्थी शब्द − संक्षेपण
- विषय का विस्तार करना − पल्लवन
- विस्तार × संक्षेप
- अनिश्चित × निश्चित
- विचार × निर्विचार
- कठिन × आसान
- जीवन में पढ़ाई का बहुत महत्त्व है। पढ़ाई-लिखाई से ही बुद्धि का विकास होता है। जीवन में मनुष्य को जीविकोपार्जन करने के लिए कोई-न-कोई काम करना ही पड़ता है। किसी भी तरह का काम करने के लिए सबसे पहले शिक्षा की जरूरत होती है। शिक्षित व्यक्ति अपने पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों को पूरी तरह निभा सकता है। शिक्षा व्यक्ति को शोषण से रक्षा करती है। इससे मनुष्य में उचित-अनुचित में भेद करना आता है। शिक्षित व्यक्ति अपने साथ दूसरों को भी उन्नति की ओर ले जाता है। आज देश में उत्तम शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था है। हर व्यक्ति को इस सुविधा का लाभ उठाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार शिक्षा अवश्य प्राप्त करे।
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