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AgF2 एक अस्थिर यौगिक है। यदि यह बन जाए, तो यह यौगिक एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है। क्यों? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

AgF2 एक अस्थिर यौगिक है। यदि यह बन जाए, तो यह यौगिक एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है। क्यों?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

AgF2 में, Ag की ऑक्सीकरण-अवस्था +2 होती है जो Ag की अत्यधिक अस्थायी अवस्था है। इसलिए, यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के बाद शीघ्रता से अपचयित होकर स्थायी ऑक्सीकरण-अवस्था +1 प्राप्त कर लेता है।

  \[\ce{\underset{\text{(अस्थायी)}}{\underset{\text{ऑक्सीकरण-अवस्था = +2}}{Ag^{2+} + e-}}->\underset{\text{(स्थायी)}}{\underset{\text{ऑक्सीकरण-अवस्था = +1}}{Ag+}}}\]

इसी कारण AgF2 (यदि प्राप्त हो जाए) एक अत्यंत प्रबल ऑक्सीकारक की भाँति व्यवहार करता है।

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ऑक्सीकरण-संख्या - अपचयोपचय अभिक्रियाओं के प्रारूप
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अध्याय 8: अपचयोपचय अभिक्रियाएँ - अभ्यास [पृष्ठ २७८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Chemistry - Part 1 and 2 [Hindi] Class 11
अध्याय 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ
अभ्यास | Q 8.10 | पृष्ठ २७८

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निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-

\[\ce{HCHO(l) + 2[Ag(NH3)2]^+(aq) + 3OH^-(aq) -> 2Ag(s) + HCOO^-(aq) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)}\]


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\[\ce{HCHO(l) + 2Cu^2+(aq) + 5OH^-(aq) -> Cu2O(s) + HCOO^-(aq) + 3H2O(l)}\]


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\[\ce{N2H4(l) + 2H2O2(l) -> N2(g) + 4H2O(l)}\]


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निम्नलिखित अभिक्रियाओं में एक ही अपचायक थायोसल्फेट, आयोडीन तथा ब्रोमीन से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया क्यों करता है?

\[\ce{2S2O^2-_3(aq) + I2(s) -> S4O^2-_6(aq) + 2I^-(aq)}\]

\[\ce{S2O^2-_3(aq) + 2Br2(I) + 5H2O(I) -> 2SO^2-_4(aq) + 4Br^-(aq) + 10H^+(aq)}\]


अभिक्रिया देते हुए सिद्ध कीजिए कि हैलोजनों में फ्लुओरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक तथा हाइड्रोहैलिक यौगिकों में हाइड्रोआयोडिक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक है।


नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती अपचायक क्षमता के क्रम में लिखिए-

K+/K = -2.93 V, Ag+/Ag = 0.80 V, Hg2+/Hg = 0.79 V
Mg2+/Mg = -2.37 V, Cr3+/Cr = -0.74 V


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