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प्रश्न
विस्तार में उत्तर
उत्तर
भारतीय डाक सेवा का एक लंबा और समृद्ध इतिहास है। यह संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है, जिसने समय के साथ कई बदलाव देखे हैं।
- पुरातन सेवाएँ (प्राचीन काल की डाक सेवाएँ)
- प्राचीन भारत में राजा-महाराजाओं के संदेशवाहक (दूत) संदेश पहुँचाने का कार्य करते थे।
- महाभारत और रामायण काल में संचार के लिए दूतों, कबूतरों, और नगाड़ों का उपयोग किया जाता था।
- मौर्य काल (चाणक्य और सम्राट अशोक के समय) में संगठित डाक व्यवस्था थी, जिसमें घुड़सवार और पैदल संदेशवाहक उपयोग किए जाते थे।
- मुगल काल में भी डाक सेवा विकसित हुई, जहाँ घुड़सवारों और विशेष दूतों से पत्र भेजे जाते थे।
- विकास (डाक सेवा का विस्तार और सुधार)
- ब्रिटिश शासन के दौरान 1854 में भारत में पहला व्यवस्थित डाक विभाग स्थापित किया गया।
- 1854 में ही पहली बार डाक टिकट जारी किए गए।
- रेल और सड़कों के विकास से डाक सेवाओं की गति बढ़ी।
- 1876 में भारत में मनी ऑर्डर सेवा शुरू हुई।
- 1911 में भारत में पहली हवाई डाक सेवा शुरू हुई।
- आजादी के बाद भारतीय डाक ने आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए कई नई सेवाएँ शुरू कीं।
- आधुनिक सेवाएँ (आज की डाक सेवाएँ)
- यह एक त्वरित डाक सेवा है जो सामान्य डाक की तुलना में तेज़ होती है।
- बड़ी वस्तुओं की तेज़ी से डिलीवरी के लिए विशेष सेवा।
- ऑनलाइन माध्यम से पैसे भेजने की सुविधा।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करना।
- ऑनलाइन पोस्टल ट्रैकिंग, ई-पोस्ट और डिजिटल लेन-देन की सुविधा।
- ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए विशेष डाक सेवाएँ।
भारतीय डाक सेवा समय के साथ विकसित होती गई है। पहले यह केवल पत्र और संदेश भेजने तक सीमित थी, लेकिन आज यह बैंकिंग, पार्सल, और डिजिटल सेवाओं जैसी कई सुविधाएँ प्रदान कर रही है। यह सेवा भारत के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पहुँच रखती है और संचार का एक महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है।
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