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प्रश्न
अंत्याक्षरी खेलना क्यों चाहता है?
उत्तर
अंत्याक्षरी इसलिए खेलना चाहता है क्योंकि उससे बुद्धि तेज़ होता है और याद करने की क्षमता बढ़ती है। मस्तिष्क का व्यायाम भी जरुरी है।
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जोड़ियाँ मिलाइए :
अ | उत्तर | आ |
धर्मयुग | ______ | मारिचिका |
सोनार बाँग्ला | ______ | अंग्रेजी लेख |
एशिया | ______ | पहली रचना |
नटखट | ______ | मैं मुर्गा हूँ |
कारण लिखिए :
शिवानी जी को पाठकों से प्रशंसा प्राप्त हुई है ______
लिखिए :
‘परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है’ आपके विचार लिखिए।
पढ़ो और समझो
पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | |
मैं | पढ़ता हूँ। गाता हूँ। |
पढ़ती हूँ। गाती हूँ। |
तुम | खेलते हो। खाते हो। |
खेलती हो। खाती हो। |
हम | सीखते हैं। | सीखती हो। |
आप | सुनते हैं। | सुनती हो। |
कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।
पुल्लिंग:
मैं दूध ______ (पी)
कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।
पुल्लिंग:
तुम केला ______ (खा)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
मोहन क्रिकेट खेलता है। (फुटबाल)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
शीला गाना गाती है।(नाचना)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
पिता जी सवेरे टहलते हैं। (तैरते)
हम दिन में ______ खाते हैं।
मैं शाम को ______ क्रिकेट खेलता हूँ।
हम रात में ______ सोते हैं।
तुम्हारा विद्यालय कहाँ है?
निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
दुर्गा प्र. नौटियालः | आपने अब तक काफी साहित्य रचा है। क्या आप इससे संतुष्ट हैं? |
शिवानी: | जहाँ तक संतुष्ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ। |
- कृति पूर्ण कौजिए: (2)
- 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए। (2)