Advertisements
Advertisements
प्रश्न
‘‘अपने पूर्वजों से यह पृथ्वी हमें विरासत इस अधिकार के रुप में न मिलकर वह हमें आने वाली पीढी की ओर से उधार मिली है’’ इस कथन का अर्थ स्पष्ट करिए।
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
- जैसे-जैसे नई पीढीयों का निर्माण होता है, वैसे-वैसे पुरानी पीढ़ी नष्ट होती जाती हैं। हमारे पूर्वजों ने जो कुछ भी पृथ्वी पर उत्पात मचाया। उस उत्पात के कारण पृथ्वी की प्रकृति दुष्प्रभावित हुई है।
- परिसंस्था में रहने वाले सजीव, उनमें होने वाली आंतरक्रिया तथा परिसंस्था में सजीवों के अधिवास के मध्य के संतुलन को मानव ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थ और विकास की भ्रामक संकल्पना के द्वारा बिगाड़ दिया।
- औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, जंगलों की कटाई इत्यादि अनेक कारणों से पृथ्वी पर विद्यमान अनेक भोजन श्रृंखला तथा भोजन जाल खंडित हो गई हैं।
- मानव की बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण उनके अन्न, वस्त्र और आवास जैसी अत्यावश्यक सुविधा में कमी हो गई है। इन सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। इस कारण परिसंस्था के संतुलन को भी नुकसान पहुँच रहा है इसका ध्यान नहीं रखा गया।
- परिणाम स्वरूप जिस पृथ्वी को हमारे पूर्वजों ने हमें सौंपा उसका संपूर्ण नुकसान करके हम पृथ्वी को नई पीढ़ी को सौंप रहे हैं। यह शाश्वत विकास नहीं है।
- प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग करने से आने वाली पीढ़ीयों को यह प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाएगा। उदा., जीवाश्म ईंधन, विविध धातुएँ इत्यादि।
- वर्तमान पीढ़ी के पूर्वजों द्वारा पर्यावरण को पहूँचाए गए नुकसान के कारण जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अकाल, अतिवृष्टि इत्यादि अनेक प्राकृतिक आपदाएँ उत्पन्न हुई हैं। इन सभी आपदाओं का सामना नई पीढ़ी को करना पड़ेगा। इसलिए हमें यह पृथ्वी हमारे पूर्वजों द्वारा विरासत में ही नहीं मिली है बल्कि इसे हमें आने वाली अगली पीढ़ी के लिए सँभालकर रखना है।
- इसे ही शाश्वत विकास कहते हैं। अतः हमें पृथ्वी आने वाली पीढ़ी की ओर से उधार मिली है। ऐसा कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।
shaalaa.com
पर्यावरण तथा परिसंस्था में संबंध
क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?