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प्रश्न
अपनी कक्षा द्वारा की गई किसी क्षेत्रभेंट का वर्णन लिखिए।
उत्तर
हर साल हमारे विद्यालय में सैर की योजना की जाती है। सारे विद्यार्थी बहुत उत्साहित थे की इस साल हमारी सैर कहा जाएगी। और वो दिन आ गया हमारे शिक्षक सुचना लेके हमारी कक्षा में पहुँच गए। उन्होंने अपनी सैर 'अजंता गुफा' जा रही है ऐसे बताया। यह सुनकर सारे विद्यार्थी ख़ुशी से चिल्लाने लगे। फिर शिक्षक ने सब को शांत करके सबको इस सैर के बारे में महत्वपूर्ण सुचना दी और वो चले गए। में और मेरे मित्र सैर में जाने का फैसला कर लिया।
मैंने 'अजंता गुफा' के बारे में बहोत कुछ सुना था। महाराष्ट्र में स्थित अजंता की गुफ़ाएं मंदिर का एक आश्चर्यजनक शानदार वास्तुशिल्प कला है। यह भारत की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। इसे यूनेस्को – 'विश्व धरोहर स्थल' के रूप में सन 1983 में स्वीकार किया गया है। अजंता की गुफाएं विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।
वो दिन आ गया। विद्यालय की सैर मुंबई से रेलवे से औरंगाबाद तक जाना था और उसके बाद अजंता की गुफाएं औरंगाबाद से लगभग 107 किलोमीटर की दूरी पर हैं तो हमने औरंगाबाद से 2-3 बस करके जाना था। मेरे और मेरे मित्र बस में बहोत मौज मस्ती की, गाने बोलने लगे, कुछ लोग प्रश्न पूछ रहे थे और सब उसका उत्तर दे रहे थे। हमारे शिक्षक मनमोहन सिंहजी ने 'अजंता गुफा' के बारे में बताने लगे। 19 वीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में, लंबे समय से दफन अजंता गुफाएं एक ब्रिटिश सेना अधिकारी द्वारा अनजाने में खोजी गईं। इस मौके पर, सुंदर मूर्तियां गुफाएं जो वाघुर नदी के ऊपर सह्याद्री पहाड़ियों के भीतर कुछ दृष्टि में आईं।
अजंता गुफाओं में कटी हुई चट्टाने है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व और छठी शताब्दी ईसा पूर्व के बीच इसकी उत्पत्ति का पता लगता हैं। अजंता की गुफाएं भगवान बुद्ध को समर्पित हैं। यह कम से कम संख्या में 30 गुफाएं है, ये गुफाएं अनुयायियों और बौद्ध धर्म के विद्यार्थियों के आवास के लिए निर्माण की गयी थीं। 'अजंता गुफा' के बारे में सुनते सुनते हम कब पहुँच गए पता नहीं चला। 'अजंता गुफा' में पहुँचतेही ही में चौक गयी। इतना विस्मर्णीय दृश्य मैंने आजतक कभी नहीं देखा। वहाँ उत्कृष्ट वास्तुकला कौशल और कलात्मक चित्रों के साथ गुफाओं को सुशोभित किया था। उन्होंने अपने प्रवास के समय के दौरान, उन्होंने अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला कौशल और कलात्मक चित्रों के साथ गुफाओं को सुशोभित किया था।
आम तौर पर, नक्काशी और चित्रकारी भगवान बुद्ध की जीवन कथाओं को दर्शाती हैं। इस के साथ, चट्टानों में मानव और पशु के कई शैलियों का भी उत्कीर्ण किया गया है। यह सब देखके मुझे गर्व महसूस होने लगा की ऐसी वास्तु हमारे महाराष्ट्र में है। इस प्रकार हमारी 'अजंता गुफा' की सैर सफल हो गयी।
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