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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (मराठी माध्यम) ९ वीं कक्षा

‘ऑरगैनिक’ (सेंद्रिय) खेती की जानकारी प्राप्त कीजिए और अपनी कक्षा में सुनाइए। - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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प्रश्न

‘ऑरगैनिक’ (सेंद्रिय) खेती की जानकारी प्राप्त कीजिए और अपनी कक्षा में सुनाइए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

ऑरगैनिक खेती एक प्राकृतिक और सतत खेती प्रणाली है जो उर्वरकों और कीटाणुनाशकों के सीमित उपयोग के साथ प्राकृतिक प्रक्रियाओं का समर्थन करती है। इस प्रणाली में किसान अपनी फसलें बनाने के लिए प्राकृतिक तत्वों का उपयोग करता है। ऑरगैनिक खेती कृषि कीं वह विधि हैं, जों संश्लेषित उर्वरकों एवं संश्लेषित कीटनाशकों के न्यूनतम प्रयोग पर आधारित है तथा जिसमें भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए फसल चक्र, हरी खाद, कंपोस्ट आदि का प्रयोग किया जाता है।

ऑरगैनिक खेती से होने वाले लाभ:

  1. कृषकों की दृष्टि से:
    1. भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है।
    2. फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
  2. भूमि स्वास्थ्य का सुरक्षा:
    1. ऑर्गेनिक खेती में केवल प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग करने के कारण भूमि की स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद हो सकती है।
    2. इससे मिट्टी की फर्टिलिटी में सुधार हो सकता है और भूमि के नाते बना रहता है।
  3. मिट्टी की दृष्टि से:
    1. जैविक खाद का उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है।
    2. भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम होता है।
  4. जल संरक्षण:
    1. ऑरगैनिक खेती में जल संवेदनशीलता को बढ़ावा दिया जाता है। 
    2. सुस्त जल स्रोतों का उपयोग करके जल संरक्षण किया जा सकता है।
  5. पर्यावरण की दृष्टि से: 
    1. भूमि के जल स्तर में वृद्धि होती है।
    2. फसल उत्पादन की लागत में कमी एवं आय में वृद्धि होती है।
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ग्रामदेवता
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अध्याय 2.3: ग्रामदेवता - स्वाध्याय [पृष्ठ ३४]

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बालभारती Hindi (Composite) - Lokvani Class 9 Maharashtra State Board
अध्याय 2.3 ग्रामदेवता
स्वाध्याय | Q ६ | पृष्ठ ३४
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