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बेन्जीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सरलतापूर्वक क्यों प्रदर्शित करती हैं, जबकि उसमें नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन होता है? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

बेन्जीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सरलतापूर्वक क्यों प्रदर्शित करती हैं, जबकि उसमें नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन होता है?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

C6H6 (बेन्जीन) की कक्षक संरचना प्रदर्शित करती है कि π-इलेक्ट्रॉन अभ्र वलय के ऊपर तथा नीचे स्थित है तथा ढीला व्यवस्थित है अत: इलेक्ट्रॉनस्नेही के लिए आसानी से उपलब्ध है, अत: बेन्जीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ शीघ्रता से देती है तथा नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन क्रियाएँ कठिनता से देती है।

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ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन - बेन्जीन का विरचन
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अध्याय 13: हाइड्रोकार्बन - अभ्यास [पृष्ठ ४०५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Chemistry - Part 1 and 2 [Hindi] Class 11
अध्याय 13 हाइड्रोकार्बन
अभ्यास | Q 13.19 | पृष्ठ ४०५
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