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प्रश्न
भारत में निर्धनता में अंतर-राज्य असमानताओं का एक विवरण प्रस्तुत करें।
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
भारत में निर्धनता के कारण अग्रलिखित हैं:
- औपनिवेशिक सरकार की नीतियों ने पारंपरिक हस्त-शिल्पकारी को नष्ट कर दिया और वस्त्र जैसे उद्योगों के विकास को हतोत्साहित किया। विकास की धीमी दर 1980 के दशक तक जारी रही। इसके परिणामस्वरूप रोजगार के अवसर घटे और आय की वृद्धि दर गिरी।
- भारतीय सरकार दो बातों में असफ़ल रही आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन और जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण जो निर्धनता चक्र को स्थिर कर सकते हैं।
- सिंचाई और हरित क्रांति के प्रसार से कृषि क्षेत्र में रोज़गार के अनेक अवसर सृजित हुए। लेकिन इनका प्रभाव भारत के कुछ भागों तक ही सीमित रहा। सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों ने कुछ रोज़गार उपलब्ध कराए। लेकिन ये रोजगार तलाश करने वाले सभी लोगों के लिए पर्याप्त नहीं हो सके। शहरों में उपयुक्त नौकरी पाने में असफ़ल अनेक लोग रिक्शा चालक, विक्रेता, गृह निर्माण श्रमिक, घरेलू नौकर आदि के रूप में कार्य करने लगे। अनियमित और कम आय के कारण ये लोग महँगे मकानों में नहीं रह सकते थे। वे शहरों से बाहर झुग्गियों में रहने लगे। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक तत्व जैसे- जाति, लिंग भेद और सामाजिक अपवर्जन जो मानव निर्धनता को बढाते हैं।
- छोटे किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशकों जैसे कृषि आगतों की खरीदारी के लिए धनराशि की जरूरत होती है। चूँकि निर्धन कठिनाई से ही कोई बचत कर पाते हैं, वे इनके लिए कर्ज लेते | हैं। निर्धनता के चलते पुनः भुगतान करने में असमर्थता के कारण वे ऋणग्रस्त हो जाते हैं। अतः अत्यधिक ऋणग्रस्तता निर्धनता का कारण और परिणाम दोनों हैं।
- आय असमानता भारत में निर्धनता का मुख्य कारण हैं। इसका मुख्य कारण भूमि और अन्य संसाधनों का असमान वितरण हैं।
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अंतर्राज्यीय असमानताएँ
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