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प्रश्न
‘भूख तो अपने में एक साग होती है’-को आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि ऐसा किसने कब और क्यों कहा?
उत्तर
‘भूख ता अपने में एक साग होती है’ का आशय यह है कि यदि भूख लगी हो और सामने रोटियाँ हों तो व्यक्ति साग होने, न होने का परवाह नहीं करता है बल्कि खाना शुरू कर देता है। भूख उसे सूखी रोटियाँ खाने पर विवश कर देती है। उक्त वाक्य घर की मालकिन ने तब कहा जब माटी वाली उनकी दी हुई एक रोटी को चबा-चबाकर चाय के साथ गले के नीचे उतार रही थी। माटी वाली से मालकिन ने तब कहा जब माटी वाली उनकी दी हुई एक रोटी को चबा-चबाकर चाय के साथ गले के नीचे उतार रही थी। माटी वाली ने मालकिन से कहा कि चाय तो बहुत अच्छा साग बन जाती है, ठकुराइन जी! तब यह बात उन्होंने कही थी क्योंकि उन्होंने बुढ़िया को चाय देने से पहले सूखी रोटियाँ चबाते हुए देख लिया था।
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