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प्रश्न
भूख तथा प्यास की आवश्यकताओं के जैविक आधार कया हैं?
दीर्घउत्तर
उत्तर
- भूख : जब किसी को भूख लगी हो तो भोजन की आवश्यकता सर्वोपरि हो जाती है। यह व्यक्ति को भोजन प्राप्त करने और उसे खाने के लिए अभिप्रेरित करती है लेकिन हमें भूख की अनुभूति क्यों होती है ? अनेक अध्ययन यह स्पष्ट करते हैं कि शरीर के भीतर तथा बाहर घटित होने वाली अनेक घटनाएँ भूख को उद्दीप्त अथवा निरुद्ध कर सकती हैं। भूख के उद्दीपकों में अन्तनिहित हैं - आमाशय में संकुचन, जो यह बताता है कि आमाशय खाली है। रक्त में ग्लूकोज की निम्न सांद्रता: प्रोटीन का निम्न स्तर तथा शरीर में वसा के भंडारण की मात्रा। शरीर में ईंध न की कमी के प्रति यकृत भी प्रतिक्रिया करता है तथा वह मस्तिष्क को तंत्रिका आवेग प्रेषित करता है। भोजन की सुगंध, स्वाद या देखने भर से खाने की इच्छा उत्पन्न करते हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें से कोई भी एक अपने आप में यह भाव नहीं जगाते कि हम भूखे हैं। ये सब बाह्य कारकों (जैसे- स्वाद, रंग, दूसरों को भोजन करते हुए देखना, तथा भोजन की सुगंध इत्यादि) के साथ संयुक्त होकर हमें यह समझने में सहायता करते हैं कि भूख लगी है। अत: यह कहा जा सकता है कि हमारी "शतक में स्थित पोषण-तृप्ति की जटिल व्यवस्था, यकृत और शरीर के अन्य अंगों तथा परिवेश में स्थित बाह्य संकेतों द्वरा नियंत्रित होती है।
कुछ शरीरक्रिया वैज्ञानिकों का मत है कि यकृत के उपापचयी क्रियाओं में होने वाले परिवर्तनों के कारण भूख की अनुभूति होती है। मस्तिष्क के उस भाग को जिसे अधश्षेतक कहते हैं, यकृत संकेत भेजता है। अधश्चेतक के दो क्षेत्र जिनका भूख से संबंध है, वे हैं पाश्चिक अधश्चेतक तथा अधर मध्य अध- श्वेतक। पाश्चविक अधश्चतेक भूख संदीपन क्षेत्र समझा जाता है। पशुओं के इस क्षेत्र को उद्दीप्त करने पर वे भोजन करने लगते हैं। जब यह क्षतिग्रस्त हो जाता है तो पशु खाना छोड़ देते हैं तथा अनशन से उनकी मृत्यु भी हो जाती है। अधर मध्य अधश्चेतक के मध्य में स्थित होता है, इसे भूख नियंत्रण क्षेत्र कहते हैं तथा यह भूख के अंतर्नाद को निरुद्ध कर देता है। - प्यास : यदि आपको दीर्घकाल तक पानी से वंचित रखा जाए तो आपको क्या होगा? आपको प्यास क्यों लगती है ? जब हम कई घंटे तक पानी पीने से वंचित रह जाते हैं तो हमारा मुँह तथा गला सूखने लगता है तथा शरीर के ऊतकों में निर्जलीकरण होने लगता है। सूखे मुँह को आई करने के लिए पानी पीना आवश्यक है किंतु केवल मुँह का सूखना ही पानी पीने के व्यवहार में परिणत नहीं होता, बल्कि शरीर के भीतर घटित होने वाली प्रक्रियाएँ प्यास तथा पानी पीने को नियंत्रित करती हैं। निर्जलीकरण में शरीर के ऊतकों में पर्याप्त मात्रा में जल पहुंचने पर ही मुँह तथा गले का सूखना दूर हो जाता है।
शारीरिक स्थितियाँ पानी पीने के व्यवहार को प्रमुख रूप से उद्दीप्त करती हैं; कोशिकाओं से पानी का क्षय तथा रक्त के परिमाण का घटना। जब शरीर से तरल द्रव्यों का क्षय होता है तो कोशिकाओं के आंतरिक भाग में भी जल का हास होता है। अग्र अधश्वेतक में कुछ तंत्रिका कोशिकाएँ होती हैं, जिन्हें परासरणग्राही कहते हैं, जो कोशिकाओं के निर्जलीकरण की स्थिति में तंत्रिका-आवेग उत्पन्न करती हैं।
यह तंत्रिका-आवेग प्यास तथा पानी पीने के लिए संकेत का कार्य करते हैं; जब प्यास का नियंत्रण परासरणग्राही द्वारा होता है तो उसे कोशिकीय- निर्जलीकरण प्यास कहते हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि जो तंत्र पानी पीने की व्याख्या करता है, वही पानी पीने को रोकने के लिए भी उत्तरदायी है। दूसरे शोधकर्ता मानते हैं कि पानी पीने के परिणामस्वरूप, आमाशय में जो उद्दीपन होता है वह पानी पीने को रोकने में प्रभावी होता है किंतु प्यास के अंतर्नाद के अंतर्निहित सुनिश्चित शरीर क्रियात्मक तंत्र को समझना अभी शेष है।
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