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प्रश्न
बखर के बारे में विस्तार से जानकारी लिखिए।
उत्तर
- ऐतिहासिक साहित्य में ‘बखर’ एक महत्त्वपूर्ण प्रकार है। हमें बखर में वीरों के शौर्यगानों का बखान, ऐतिहासिक गतिविधियों, युदधों, महापुरुषों के चरित्र के विषय में किया गया लेखन पढ़ने को मिलता है।
- मराठी भाषा में विभिन्न प्रकार की ‘बखरें’ उपलब्ध हैं। उनमें ‘सभासद की बखर’ को महत्त्वपूर्ण बखर माना जाता है। छत्रपति राजाराम महाराज के कार्यकाल में कृष्णाजी अनंत सभासद ने यह बखर लिखी। इस बखर द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल की जानकारी प्राप्त होती है।
- ‘भाऊसाहेबांची बखर’ (भाऊसाहब की बखर) में पानीपत के युद्ध का वर्णन मिलता है। इसी विषय पर आधारित ‘पानिपतची बखर’ (पानीपत की बखर) नामक स्वतंत्र बखर भी लिखी गई है। ‘होळकरांची कैफियत’ (होलकरों का विवरण) बखर द्वारा हमें होलकरों का घराना और उनके द्वारा दिए गए योगदान का बोध होता है।
- बखरों के चरित्रात्मक, वंशानुचरित्रात्मक, प्रसंग वर्णनात्मक, पंथीय, आत्मचरित्रपर, कैफियत, पौराणिक और राजनीतिपर जैसे प्रकार पाए जाते हैं।
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संबंधित प्रश्न
भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के प्रथम महानिदेशक _______ थे।
निम्न कथन को कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
ऐतिहासिक साहित्य में बखर महत्त्वपूर्ण प्रकार है।
दिए् गए परिच्छेद को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए्:
सोहगौड़ा ताम्रपट: यह ताम्रपट सोहगौड़ा (जिला गोरखपुर, उत्तर प्रदेश) में पाया गया। माना जाता है कि यह ताम्रपट मौर्य कालखंड का होना चाहिए। ताम्रपट पर उकेरे गए लेख ब्राम्ही लिपि में हैं। लेख के प्रारंभ में जो चिह्न हैं; उनमें चबूतरायुक्त पेड़ तथा पर्वत (एक पर दूसरी; इस प्रकार तीन कमानें) ये चिह्न प्राचीन आहत सिक्कों पर भी पाए जाते हैं। चार खंभों पर खड़े दुमंजिला मकानों की भाँति दिखाई देने वाले चिह्न भंडारघरों के निदेशक होंगे; ऐसा अध्ययनकर्तांओं का मत है। इन भंडारघरों के अनाज का उपयोग सावधानीपूर्वक करें; इस प्रकार का आदेश इस लेख में अंकित है। ऐसा माना जाता है कि अकाल सदृश्य स्थिति का निवारण करने के लिए कौन-सी सावधानी बरतनी चाहिए। इस संदर्भ में यह आदेश दिया गया होगा। |
- सोहगौड़ा ताम्रपट कहाँ मिला?
- ताम्रपट पर उकेरे गए लेख कौन-सी लिपि में है?
- सोहगौड़ा ताम्रपट इतिहास का साधन है। स्पष्ट कीजिए।
बखर किसे कहते हैं?