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प्रश्न
बताइए कि ब्रिटेन के औद्योगीकरण के स्वरूप-कच्चे माल की आपूर्ति को क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर
विश्व के किसी भी औद्योगीकरण देश को अपने कारखाने को चलाने के लिए कच्चे माल की आवश्यकता होती है। यदि उस देश में कच्चे माल की कमी है तो उसकी आपूर्ति दूसरे देशों से मँगाकर की जाती है।
ब्रिटेन में लोहे व कोयले की खानें पर्याप्त मात्रा में थीं जिसके कारण उसके लिए लोहा और इस्पात से बनने वाली मशीनों के निर्माण में काफी मदद मिली। फलतः लौह उद्योग के क्षेत्र में वह अग्रणी देश बन गया।
वस्त्र उद्योग ब्रिटेन का दूसरा प्रमुख उद्योग था। उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में कपास की जरूरत थी। वैसे तो इंग्लैंड में उपनिवेशों के स्थापित होने से पूर्व भी कपड़ा बुनने का काम होता था, किंतु बहुत सीमित रूप से। उपनिवेशों के स्थापित होने के बाद इंग्लैंड को पर्याप्त मात्रा में कपास आसानी से उपलब्ध होने लगी। विशेष रूप से भारत से प्रतिवर्ष रुई की हज़ारों गाँठे इंग्लैंड पहुँचती थीं। हम यह भी कह सकते हैं कि इंग्लैंड के सूती वस्त्र उद्योग का अस्तित्त्व भारत से पहुँचने वाली रुई की गाँठों पर निर्भर था।
रेलवे निर्माण एवं जहाज निर्माण भी इंग्लैंड का एक महत्त्वपूर्ण उद्योग था। हालाँकि इन उद्योगों के लिए उत्तम कोटि की लकड़ी की आवश्यकता थी। उसे उत्तम कोटि की लकड़ी भारत तथा अमरीकी बस्तियों से मिलती थी। यदि इन दोनों स्थानों से उत्तम लकड़ी नहीं मिलती तो संभवतः जहाज निर्माण एवं रेलवे निर्माण उद्योग का उल्लेखनीय विकास न हो पाता।
अत: यह स्पष्ट हो जाता है कि ब्रिटेन के औद्योगिकीकरण के स्वरूप पर कच्चे माल की आपूर्ति का पर्याप्त प्रभाव हुआ।