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‘चंद्रगहना से लौटती बेर’ कविता में सारस का स्वर कवि को कैसा प्रतीत होता है? इसे सुनकर उसके मन में क्या इच्छा होती है? - Hindi Course - A

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प्रश्न

‘चंद्रगहना से लौटती बेर’ कविता में सारस का स्वर कवि को कैसा प्रतीत होता है? इसे सुनकर उसके मन में क्या इच्छा होती है?

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उत्तर

‘चंद्रगहना से लौटती बेर’ कविता में कवि को सारस का स्वर उठता-गिरता अर्थात् कभी धीमा तथा कभी तेज़ सुनाई देता है। उसके कानों को यह स्वर अच्छा लगता है। इससे उसके मन में यह इच्छा होती है कि वह भी सारस के साथ पंख फैलाकर कहीं दूर उड़ जाए। जहाँ सारस की जुगुल जोड़ी रहती है।

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पद्य (Poetry) (Class 9 A)
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अध्याय 14: चंद्र गहना से लौटती बेर - अतिरिक्त प्रश्न

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एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 1 Class 9
अध्याय 14 चंद्र गहना से लौटती बेर
अतिरिक्त प्रश्न | Q 11

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