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चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूद एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की क्षमता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने तर्कों से अपने विचारों को पुष्ट करें। - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूद एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की क्षमता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने तर्कों से अपने विचारों को पुष्ट करें।

दीर्घउत्तर

उत्तर

हाँ, हम इस कथन से सहमत हैं। चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओ में मौजूदा एक ध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की पूरी क्षमता है। हम इस विचार की पुष्टि के समर्थन में निम्न तर्क दे सकते हैं -

  1. चीन और भारत दोनों एशिया के दो प्राचीन, महान शक्तिशाली एवं साधन संपन्न देश है। दोनों में परस्पर सुदॄढ़ मित्रता और सहयोग अमरीका के लिए चिंता का कारण बन सकता है। दोनों देश अंतर्राष्टीय राजनैतिक और आर्थिक मंचो पर एक सी निति और दृष्टिकोण अपनाकर एकध्रुवीय विश्वव्यवस्था के संचालन करने वाले राष्ट अमरीका और उसके मित्रों को चुनौती देने में समक्ष हैं।
  2. चीन और भारत दोनों की जनसंख्या 200 करोड़ से भी अधिक है। इतना विशाल जनमानस अमरीका के निर्मित माल के लिए एक विशाल बाजार प्रदान कर सकता है। पश्चिमी देशों एवं अन्य देशों को कुशल और अकुशल सस्ते श्रमिक दे सकते हैं।
  3. दोनों देशों नई अर्थव्यवस्था, मुक्त व्यापार निति, उदारीकरण, वैश्वीकरण, और अंतर्राष्टीय सहयोग के पक्षधर हैं। दोनों देश विदेश पूंजी निवेश का स्वागत कर एकध्रुवीय महाशक्ति अमरीका और अन्य बहुराष्ट्रीय निगम समर्थक कम्पनियाँ स्थापित और संचालन करने वाले राष्टों को लुभाने, आंतरिक आवश्यकता सुविधाएँ प्रदान करके अपने यहाँ आर्थिक विकास की गति को बहुत ज्यादा बढ़ा सकते हैं।
  4. दोनों ही राष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यो में परस्पर सहयोग करके प्रौद्योगिक के क्षेत्र में आश्चर्यजनक प्रगति कर सकते है।
  5. दोनों देश विश्व बैंक, अंतर्राष्टीय मुद्रा कोष से त्रृण लेते समय अमरीका और अन्य बड़ी शक्तियों की मनमानी शर्ते थोपने पर नियंत्रण रख सकते हैं।
  6. चीन और भारत तस्करी रोकने, नशीली दवाओं के उत्पादन, वितरण, प्रदूषण फैलाने वाले कारको और आतंकवादियों की गतिविधियों को रोकने में पूर्ण सहयोग देकर भी विश्व व्यवस्था की चुनौतियों को कम कर सकते हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में सहयोग से न केवल कीमतों के बढ़ने की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है बल्कि लोगों का स्वास्थ्य और सुरक्षा बढ़ेगी। दोनों में आंतरिक सद्भाव, शांति, औद्योगिक विकास के अनुकूल वातावरण से निःसंदेह विदेशी पूंजी, उधमियों, व्यापारियों, नवीनतम प्रोद्योगिक आदि के आने और नई - नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, विभिन्न प्रकार की सेवाओं की वृद्धि और विस्तार में मदद मिलेगी।
  7. दोनों ही देश सीमाओं पर स्थित या प्रवाहित होने वाली दनियों और जल भंडारों और बाँधों द्वारा बाढ़ नियंत्रिण, जल विद्युत्त निर्माण, जलआपूर्ति, मत्स्य उद्योग, पर्यटन उद्योग आदि को बढ़ा सकते हैं। दोनों ही देश सड़क निर्माण, रेल लाइन विस्तार, वायुयान और जल मार्ग संबंधी सुविधओं के क्षेत्रों में पारस्परिक आदान - प्रदान और असहयोग की नीतियाँ अपनाकर अपने को शीघ्र ही महाशक्तियों की श्रेणी में ला सकते हैं। खनिज संपदा, कृषि उत्पाद, प्राकृतिक संसाधनों (जैसे - वन उत्पादों, पशुधन) सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग आदि के क्षेत्र में यथा क्षमता तथा आवश्यकता की निति अपनाकर निःसंदेह एवध्रुवीय विश्वव्यवस्था को मजबूत चुनौती दे सकते हैं।
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चीनी अर्थव्यवस्था का उत्थान
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अध्याय 4: सत्ता के वैकल्पिक केंद्र - प्रश्नावली [पृष्ठ ६४]

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एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 12
अध्याय 4 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र
प्रश्नावली | Q 12. | पृष्ठ ६४
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