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दबाव के लक्षणो तथा स्रोतों का वर्णन कीजिए। - Psychology (मनोविज्ञान)

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प्रश्न

दबाव के लक्षणो तथा स्रोतों का वर्णन कीजिए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

दबाव के लक्षण - हर व्यक्ति की दबाव के प्रति अनुक्रिया उसके व्यक्तित्व पालन - पोषण तथा जीवन के अनुभवों के आधार पर भिन्न - भिन्न होती है। प्रत्येक व्यक्ति के दबाव अनुक्रियाओं के अलग - अलग प्रतिरूप होते हैं। अतः चेतावनी देने वाले संकेत तथा उनकी तीव्रता भी भिन्न - भिन्न होती है। हममें से कुछ व्यक्ति अपनी दबाव अनुक्रियाओं को पहचानते हैं तथा अपने लक्षणो की गंभीरता तथा प्रकृति के आधार पर अथवा व्यवहार में परिवर्तन के आधार पर समस्या की गहनता का आकलन कर लेते हैं। दबाव के ये लक्षण शारीरिक, संवेगात्मक तथा व्यवहारात्मक होते हैं। कोई भी लक्षण दबाव की प्रबलता को ज्ञापित कर सकता है, जिसका यदि निराकरण न किया जाए तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

दबाव के स्रोत - दबाव के निम्नलिखित स्रोत हो सकते हैं।

  1. जीवन घटनाएँ - जब से हम पैदा होते है, तभी से बड़े और छोटे , एकाएक उत्पन्न होने वाले और धीरे - धीरे घटित होने वाले परिवर्तन हमारे जीवन को प्रभवित करते रहते हैं। हम छोटे तथा दैनिक होने वाले परिवर्तनों का सामना करना तो सिख लेते हैं किन्तु जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ दबावपूर्ण हो सकती हैं। क्योंकि वे हमारी दिनचर्या को बाधित करती है और उथल - पुथल मचा देती हैं। यदि इस प्रकार की कई घटनाएँ चाहे वे योजनाबद्ध हों (जैसे - घर बदलकर नए घर में जाना) या पूर्वानुमानित न हो (जैसे - किसी दीर्घकालीन संबंध का टूट जाना) कम समय अवधि में घटित होती हैं, जो हमें उनका सामना करने में कठिनाई होती है तथा दबाव के लक्षणो के प्रति अधिक प्रवण होते हैं।
  2. परेशान करने वाली घटनाएँ - इस प्रकार के दबावों की प्रकृति व्यक्तिगत होती है, जो अपने दैनिक जीवन में घटने वाली घटनाओं के कारण बनी रहती है। कोलाहलपूर्ण परिवेश, प्रतिदिन का आना - जाना, झगड़ालू पड़ोसी,बिजली - पानी की कमी, यातायात की भीड़ - भाड़ इत्यादि ऐसी कष्टप्रद घटनाएँ हैं। कुछ व्यवसायों में ऐसी परेशानियों का बहुत तबाहीपूर्ण परिणाम उस व्यक्ति के लिए होता है जो उन घटनाओं का सामना अकेले करता है क्योकि बाहरी दूसरे व्यक्तियों को इन परेशानियों की जानकारी भी नहीं होती। जो व्यक्ति इन परेशानियों के कारण जितना ही अधिक दबाव अनुभव करता है उतना ही अधिक उसका मनोवैज्ञानिक कुशल - क्षेम नम्र स्तर का होता है।
  3. अभिघातज घटनाएँ - इनके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की गंभीर घटनाएँ जैसे - अग्रिकांड, रेलगाड़ी या सड़क दुर्घटना, लूट, भूकंप, सुनामी इत्यादि सम्मिलित होती हैं। इस प्रकार की घटनाओं का प्रभाव कुछ समय बीत जाने के बाद दिखाई देता है। तथा कभी - कभी ये प्रभाव दुरिंचता, अतितावलोकन, स्वप्रे तथा अंतरवेथी विचार इत्यादि के रूप में सतत रूप से बने रहते हैं। तीव्र अभिघतो के कारण संबंधो में भी तनाव उत्पन्न हो जाता हैं। इनका सामना करने के लिए विशेषज्ञों की सहायता की आवश्यकता पड़ सकती हैं, विशेष रूप से तब जब वे घटना के पश्चात् महीनो तक सतत रूप से बने रहें।
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दबाव की प्रकृति, प्रकार एवं स्रोत
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अध्याय 3: जीवन की चुनौतियों का सामना - समीक्षात्मक प्रश्न [पृष्ठ ७३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Psychology [Hindi] Class 12
अध्याय 3 जीवन की चुनौतियों का सामना
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 2. | पृष्ठ ७३
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