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दबाव-समूहों की गतिविधियाँ लोकतांत्रिक सरकार के कामकाज में कैसे उपयोगी होती हैं? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

दबाव-समूहों की गतिविधियाँ लोकतांत्रिक सरकार के कामकाज में कैसे उपयोगी होती हैं?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

दबाव-समूहों की गतिविधियाँ लोकतांत्रिक सरकार के कामकाज में उपयोगी साबित होती हैं –

  1. आम नागरिक की जरूरतों से सरकार को अवगत कराते हैं – ये दबाव-समूह शासकों के ऊपर दबाव डालकर लोकतंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकारें अक्सर धनी और ताकतवर लोगों के अनुचित दबाव में आ जाती हैं। जनसाधारण के हित समूह इस अनुचित दबाव के प्रतिकार में उपयोगी भूमिका निभाते हैं और आम नागरिकों की जरूरतों और समस्याओं से सरकार को अवगत कराते हैं।
  2. सरकार की निरंकुशता पर रोक लगाते हैं – सरकार पर यदि कोई एक समूह अपने हित में नीति बनाने के लिए दबाव डालता है तो दूसरा समूह उसके प्रतिकार में दबाव डालेगा कि नीतियाँ उस तरह से न बनाई जाएँ। सरकार निरंकुश नहीं हो पाती, ये समूह सरकार पर अंकुश बनाए रखते हैं तथा सरकार को ये भी पता चलता रहता है कि समाज के विभिन्न वर्ग क्या चाहते हैं। इससे परस्पर विरोधी हितों के बीच सामंजस्य बिठाना तथा शक्ति संतुलन करना संभव होता है।
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दबाव-समूह और आंदोलन
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अध्याय 5: जन-संघर्ष और आंदोलन - प्रश्नावली [पृष्ठ ६९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Social Science (Political Science) - Democratic Politics 2 [Hindi] Class 10
अध्याय 5 जन-संघर्ष और आंदोलन
प्रश्नावली | Q 3. | पृष्ठ ६९

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दबाव-समूह और राजनीतिक दल में क्या अंतर है?


जो संगठन विशिष्ट सामाजिक वर्ग जैसे मज़दूर, कर्मचारी, शिक्षक और वकील आदि के हितों को बढ़ावा देने की गतिविधियाँ चलाते हैं उन्हें ______ कहा जाता है।


निम्नलिखित में से किस कथन से स्पष्ट होता है कि दबाव-समूह और राजनीतिक दल में अंतर होता है


सूची-I ( संगठन और संघर्ष) का मिलान सूची-II से कीजिए और सूचियों के नीचे दी गई सारणी से सही उत्तर चुनिए –

  सूची-I सूची-II
1 किसी विशेष तबके या समूह के हितों को बढ़ावा देने वाले संगठन (क) आंदोलन
2 जन - सामान्य के हितों को बढ़ावा देने वाले संगठन (ख) राजनीतिक दल
3 किसी सामाजिक समस्या के असाधान के लिए चलाया गया एक ऐसा संघर्ष जिसमे सांगठनिक संरचना हो भी सकती है और नहीं भी। (ग) वर्ग - विशेष के हित समूह
4 ऐसा संगठन जो राजनितिक सत्ता पाने की गरज़ से लोगों को लामबंद करता है। (घ) लोक कल्याणकरी हित समूह

सूची-I का सूची-II से मिलान करें और सूचियों के नीचे दी गई सारणी में से सही उत्तर को चुनें –

  सूची-I सूची-II
1. दवाब-समूह  नर्मदा बचाओ आंदोलन
2. लंबी अवधि का आन्दोलन  असम गण परिषद् 
3. एक मुद्दे पर आधारित आंदोलन महिला आंदोलन
4. राजनीतिक दल  खाद विक्रेताओ का संघ

दबाव-समूहों और राजनीतिक दलों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

(क) दबाव-समूह समाज के किसी खास तबके के हितों की संगठित अभिव्यक्ति होते हैं।
(ख) दबाव-समूह राजनीतिक मुद्दों पर कोई-न-कोई पक्ष लेते हैं।
(ग) सभी दबाव -समूह राजनीतिक दल होते हैं।

अब नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनें –


मेवात हरियाणा का सबसे पिछड़ा इलाका है। यह गुड़गाँव और फ़रीदाबाद जिले का हिस्सा हुआ करता था। मेवात के लोगों को लगा कि इस इलाके को अगर अलग ज़िला बना दिया जाय तो इस इलाके पर ज्यादा ध्यान जाएगा। लेकिन, राजनीतिक दल इस बात में कोई रुचि नहीं ले रहे थे। सन् 1996 में मेवात एजुकेशन एंड सोशल आर्गनाइजेशन तथा मेवात साक्षरता समिति ने अलग ज़िला बनाने की माँग उठाई। बाद में सन् 2000 में मेवात विकास सभा की स्थापना हुई। इसने एक के बाद एक कई जन-जागरण अभियान चलाए। इससे बाध्य होकर बड़े दलों यानी कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल को इस मुद्दे पर अपना समर्थन देना पड़ा। उन्होंने फ़रवरी 2005 में होने वाले विधान सभा के चुनाव से पहले ही कह दिया कि नया जिला बना दिया जाएगा। नया ज़िला सन् 2005 की जुलाई में बना।

इस उदाहरण में आपको आंदोलन, राजनीतिक दल और सरकार के बीच क्या रिश्ता नज़र आता है? क्या आप कोई ऐसा उदाहरण दे सकते हैं जो इससे अलग रिश्ता बताता हो?


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