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दुलारी का टुन्नू को यह कहना कहाँ तक उचित था - "तैं सरबउला बोल ज़िन्दगी में कब देखने लोट?...!"दुलारी से इस आपेक्ष में आज के युवा वर्ग के लिए क्या संदेश छिपा है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। - Hindi Course - A

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प्रश्न

दुलारी का टुन्नू को यह कहना कहाँ तक उचित था - "तैं सरबउला बोल ज़िन्दगी में कब देखने लोट?...!"दुलारी से इस आपेक्ष में आज के युवा वर्ग के लिए क्या संदेश छिपा है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

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उत्तर

यहाँ दुलारी ने उन लोगों पर आक्षेप किया है जो असल ज़िन्दगी में कुछ करते नहीं मात्र दुसरों की नकल पर ही आश्रित होते हैं। उसके अनुसार इस ज़िन्दगी में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता। इस ज़िन्दगी में कब नोट या धन देखने को मिल जाए कोई कुछ नहीं जानता। इसलिए हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।

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एही ठैयाँ झुलनी हैरानी हो रामा!
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अध्याय 4: एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ४१]

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एनसीईआरटी Hindi - Kritika Part 2 Class 10
अध्याय 4 एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!
प्रश्न-अभ्यास | Q 6 | पृष्ठ ४१

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