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प्रश्न
एक विकसित होते हुए शिशु के लिए एक अच्छा भूमिका - प्रतिरूप अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अधिगम के उस प्रकार पर विचार -विमर्श कीजिए जो इसका समर्थन करता है।
उत्तर
प्रेक्षणात्मक अधिगम दूसरों का प्रेक्षण करने से घटित होता है। अधिगम के इस रूप को पहले अनुकरण कहा जाता था। बंदूरा और उनके सहयोगियों ने विभिन्न प्रायोगिक अध्ययनों में प्रेक्षणात्मक अधिगम की विस्तृत खोजबीन की। इस प्रकार के अधिगम में व्यक्ति सामाजिक व्यवहारों को सीखना है, इसलिए इसे कभी-कभी सामाजिक अधिगम भी कहा जाता है। मानव के समक्ष ऐसी अनेक सामाजिक स्थितियों में हम दूसरे व्यक्तिओं के व्यवहारों का प्रेक्षण करते हैं और उनके समान व्यवहार करने लगते हैं। इस प्रकार के अधिगम को मॉडलिंग कहा जाता है।
छोटे शिशु घर में तथा सामाजिक उत्सवों एवं समारोहों में प्रौढ़ व्यक्तियों के अनेक प्रकार के व्यवहारों का ध्यान से प्रेक्षण करते हैं; इसके बाद अपने खेल में उन्हें दुहराते हैं। जैसे -छोटे बच्चे विवाह समारोह, जन्मदिन, प्रीतिभोज, चोर और सिपाही, घर-रखाव आदि के खेल खेलते हैं। वे अपने खेलों में ऐसा सब करते हैं जैसा वे समाज में और टेलीविजन पर देखते हैं तथा पुस्तकों में पढ़ते हैं।
बच्चे अधिकांश सामाजिक व्यवहार प्रौढ़ों द्वारा किया गया प्रेक्षण तथा उनकी नकल करके सीखते हैं। कपड़े पहनना, बालों को सँवारने की शैली और समाज में किस प्रकार रहा जाए यह सभी दूसरों को देखकर सीखा जाता है। विभिन्न अध्ययनों से यह भी ज्ञात हुआ है कि बच्चों में व्यक्तित्व का विकास भी प्रेक्षणात्मक अधिगम के द्वारा ही होता है। आक्रामकता, परोपकार, आदर, नम्रता, परिश्रम, आलस्य आदि गुण भी अधिगम की इसी विधि द्वारा अर्जित किए जाते हैं।