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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

‘गांधीजी एक प्रेरणादायी व्यक्‍तित्‍व’, विषय पर अपना मत लिखिए। - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

‘गांधीजी एक प्रेरणादायी व्यक्‍तित्‍व’, विषय पर अपना मत लिखिए।

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उत्तर

महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर, 1869 में हुआ। महात्मा गांधी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी कहा जाता है। वह देश की इतिहास में बेहद बेहतरीन तथा महत्वपूर्ण सखसियत हैं। उन्होंने देश के लिए बहुत योगदान दिया है। देश की आजादी में महात्मा गांधी का अहम योगदान रहा।

गांधी जी स्वयं श्रम करते थे और वे चाहते थे कि दूसरे भी श्रम करें। वे अपने कपड़े स्वयं धोते थे। अपना चप्पल वे स्वयं सिलते थे। आश्रम में रहने वाले सभी आश्रमवासियों को अपना काम स्वयं करना पड़ता था। दैनिक जीवन में गांधी जी  श्रम को बहुत महत्त्व देते थे। उनकी मान्यता थी कि एक कर्मचारी, जो सड़क साफ करता है और एक प्रधानमंत्री जो राज्य का कामकाज चलाता है, दोनों समाज के महत्वपूर्ण अंग हैं। एकबार गांधी जी ने कार्यकर्ताओं की गोष्ठी में शौचालय साफ करने पर बहुत जोर दिया था। प्रायः पढ़े-लिखे लोग श्रम करने से कतराते हैं। गांधी जी जब अन्य कामों से अवकाश पाते, तो चरखा कातने लगते। इस प्रकार गांधी जी के व्यक्तित्व से हमें श्रम करने तथा साफ-सफाई से रहने की प्रेरणा मिलती है।

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जानता हूँ मैं
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अध्याय 2.03: जानता हूँ मैं - अभिव्यक्‍ति [पृष्ठ ७३]

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बालभारती Hindi - Kumarbharati 10 Standard SSC Maharashtra State Board
अध्याय 2.03 जानता हूँ मैं
अभिव्यक्‍ति | Q १. | पृष्ठ ७३

संबंधित प्रश्न

संजाल पूर्ण कीजिए : 


कृति पूर्ण कीजिए :

महात्‍मा गांधी की स्‍वभावगत विशेषताएँ : 

१. ______

२. ______  


कृति पूर्ण कीजिए :

महात्‍मा गांधी के बताए मार्ग की विशेषताएँ :

१. ______

२. ______  


उत्‍तर लिखिए : 

महात्‍मा गांधी का इनपर भरोसा है

१) ______

२) ______ 


उत्‍तर लिखिए : 

महात्‍मा गांधी की अंतरात्‍मा की बातें : 

१) ______

२) ______ 


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मेरा जीवन एक खुली किताब रहा है। मेरे न कोई रहस्‍य हैं और न मैं रहस्‍यों को प्रश्रय देता हूँ।

मैं पूरी तरह भला बनने के लिए संघर्षरत एक अदना-सा इनसान हूँ। मैं मन, वाणी और कर्म से पूरी तरह सच्चा और पूरी तरह अहिंसक बनने के लिए संघर्षरत हूँ। यह लक्ष्य सच्चा है, यह मैं जानता हूँ पर उसे पाने में बार-बार असफल हो जाता हॅूं। मैं मानता हूँ कि इस लक्ष्य तक पहुँचना कष्‍टकर है पर यह कष्‍ट मुझे निश्चित आनंद देने वाला लगता है। इस तक पहुँचने की प्रत्‍येक सीढ़ी मुझे अगली सीढ़ी तक पहुँचने के लिए शक्‍ति तथा सामर्थ्य देती है।

जब मैं एक ओर अपनी लघुता और अपनी सीमाओं के बारे में सोचता हूँ और दूसरी ओर मुझसे लोगों की जो अपेक्षाएँ हो गई हैं, उनकी बात सोचता हूँ तो एक क्षण के लिए तो मैं स्‍तब्‍ध रह जाता हूँ। फिर यह समझकर प्रकृतिस्‍थ हो जाता हूँ कि ये अपेक्षाएँ मुझसे नहीं हैं। ये सत्‍य और अहिंसा के दो अमूल्‍य गुणों के मुझमें अवतरण हैं। यह अवतरण कितना ही अपूर्ण हो पर मुझमें अपेक्षाकृत अधिक द्रष्‍टव्य है। 

(1) कारण लिखिए:      (2)

  1. लेखक का जीवन एक खुली किताब है -
  2. लेखक प्रकृतिस्थ हो जाते हैं -

(2) लिखिए :     (2)

(i)

(ii)

(3) 'कथनी और करनी में समानता होनी चाहिए' विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।    (3)


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