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प्रश्न
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'जाति-प्रथा के आधार पर किया गया श्रम-विभाजन मनुष्य और समाज दोनों के लिए अहितकर है' −उचित तर्क द्वारा इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
'जाति-प्रथा के आधार पर किया गया श्रम-विभाजन मनुष्य और समाज दोनों के लिए अहितकर है' क्योंकि जाति के आधार पर श्रम-विभाजन करने से व्यक्ति की निजी क्षमता का पूरा सदुपयोग नहीं होने देता। जाति प्रथा व्यक्ति को जीवनभर एक ही पेशे से बाँध देती है, और पेशा बदलने की स्थिति में उसे गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह विभाजन कार्य के प्रति अरुचि और उसे टालने की प्रवृत्ति पैदा करता है, जिससे कार्य में कुशलता हासिल नहीं हो पाती। जाति आधारित श्रम-विभाजन व्यक्ति की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं होता और आर्थिक रूप से भी नुकसानदायक होता है। यह व्यक्ति की स्वाभाविक प्रेरणा, रुचि और आत्मशक्ति को दबाकर उसे निष्क्रिय बना देता है। इसलिए यह मनुष्य और समाज दोनों के लिए अहितकर सिद्ध होता है।