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ग्लाइकोसिडिक, पेप्टाइड तथा फॉस्फो-डाइस्टर बंधों का वर्णन कीजिए? - Biology (जीव विज्ञान)

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प्रश्न

ग्लाइकोसिडिक, पेप्टाइड तथा फॉस्फो-डाइस्टर बंधों का वर्णन कीजिए?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

1. ग्लाइकोसाइडिक बन्ध:
बहुलकीकरण में मोनोसैकेराइड अणु एक-दूसरे के पीछे जिस सहसंयोजी बन्ध द्वारा जुड़ते हैं उसे ग्लाइकोसाइडिक बन्ध कहते हैं। इस बन्ध में एक मोनोसैकेराइड अणु का ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह दूसरे अणु के एक ऐल्कोहॉलिय अर्थात् हाइड्रॉक्सिल समूह (-OH) से जुड़ता है जिसमें कि जल (H,O) का एक अणु पृथक् हो जाता है।

2. पेप्टाइड बन्ध:
जिस बन्ध द्वारा अमीनो अम्लों के अणु एक-दूसरे से आगे-पीछे जुड़ते हैं, उसे पेप्टाइड या ऐमाइड बन्ध कहते हैं। यह बन्ध सहसंयोजी होता है और एक अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिलिक समूह की अगले अमीनो अम्ल के अमीनो समूह से अभिक्रिया के फलस्वरूप बनता है। इसमें जल का एक अणु हट जाता है।

3. फॉस्फोडाइएस्टर बन्ध:
न्यूक्लीक अम्ल के न्यूक्लिओटाइड्स फॉस्फोडाइएस्टर बन्धों द्वारा एक-दूसरे से संयोजित होकर पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला बनाते हैं। फॉस्फोडाइएस्टर बन्ध समीपवर्ती दो न्यूक्लियोटाइड्स के फॉस्फेट अणुओं के मध्य बनता है। DNA की दोनों पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं के नाइट्रोजन क्षारक हाइड्रोजन बन्धों द्वारा जुड़े होते हैं।

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एक बहुलक में एककों को जोड़ने वाले बंधों की प्रकृति
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