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ग्रामीण बंगाल के बहुत से इलाकों में जोतदार एक ताकतवर हस्ती क्यों था? - History (इतिहास)

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प्रश्न

ग्रामीण बंगाल के बहुत से इलाकों में जोतदार एक ताकतवर हस्ती क्यों था?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

  • ग्रामीण बंगाल के बहुत से इलाकों में जोतदार एक ताकतवर हस्ती निम्नलिखित कारणों से था
  1. 18 वीं शताब्दी के अंत में एक ओर जहाँ कई जमींदार आर्थिक दृष्टि से संकट की स्थिति से गुजर रहे थे, वहीं दूसरी ओर जोतदार धनी किसानों के रूप में अनेक गाँवों में अपनी स्थिति मजबूत किए हुए थे।
  2. 19वीं शताब्दी के शुरू के वर्षों के आते-आते इन जोतदारों ने जमीन के बड़े-बड़े भूखंडों को प्राप्त कर लिया था।
  3. ये जोतदार प्रायः अपनी जमीन का बहुत बड़ा भाग बटाईदारों के माध्यम से जुतवाते थे। वे बटाईदार एक तरह से जोतदारों के अधीन होते थे तथा उपज के बाद कुल पैदावार का आधा भाग जोतदारों को दे देते थे।
  4. कई गाँवों में जोतदारों की ताकत जमींदारों की ताकत की तुलना में अधिक प्रभावशाली थी। ये जोतदार जमींदारों की तरह जमीनों से दूर शहरों में नहीं बल्कि गाँव में रहते थे और इस तरह गाँवों के गरीब ग्रामीणों के काफी बड़े वर्ग पर सीधा नियंत्रण करते थे।
  5. जमींदारों द्वारा लगान बढ़ाने की कोशिश करने पर ये जोतदार उन जमींदारों का घोर विरोध करते थे तथा रैयत (काश्तकार | या जमीन जोतने वाले) जोतदारों के पक्ष में होते थे। रैयत जमींदारों का जमा, लगान इन्हीं जोतदारों के इशारे पर देर से भुगतान करते थे। इस तरह जमींदारों की स्थिति खस्ता हो जाती थी। उनकी जमींदारियों की नीलामी होती थी तो जोतदार | अपने धन और बटाईदारों के सहयोग से जमीनों को खरीद लेते थे।
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बंगाल और वहाँ के ज़मींदार
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अध्याय 10: उपनिवेशवाद और देहात - अभ्यास [पृष्ठ २८६]

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एनसीईआरटी History [Hindi] Class 12
अध्याय 10 उपनिवेशवाद और देहात
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ २८६
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