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प्रश्न
हैलोजेन प्रबल ऑक्सीकारक क्यों होते हैं?
उत्तर
हैलोजेनों में अल्प आबंध वियोजन एन्थैल्पी, उच्च विद्युत ऋणात्मकता तथा अधिक ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित होने की प्रबल प्रवृत्ति होती है।
\[\ce{X + e^- -> X^-}\]
अत: हैलोजेन प्रबल ऑक्सीकरण कर्मक या ऑक्सीकारक होते हैं। यद्यपि इनकी ऑक्सीकारक क्षमता F2 से I2 तक घटती है जैसा कि इनके इलेक्ट्रोड विभवों से सत्यापित होता है –
\[\ce{E^Θ_{F_2/F^-}}\] = + 2.87 V
\[\ce{E^Θ_{Cl_2/Cl^-}}\] = + 1.36 V
\[\ce{E^Θ_{Br_2/Br^-}}\] = + 1.09 V
\[\ce{E^Θ_{I_2/I^-}}\] = + 0.54 V
इसलिए F2 प्रबलतम तथा I2 दुर्बलतम ऑक्सीकारक होता है।
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