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प्रश्न
हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सूची बनाइए और चर्चा कीजिए कि ये किस | प्रकार प्राप्त किए जाते होंगे?
उत्तर
हड़प्पा सभ्यता के लोगों की शिल्प तथा उद्योग संबंधी प्रतिभा उच्चकोटि की थी। मिट्टी और धातु के बर्तन बनाना, मूर्तियाँ, औजार एवं हथियार बनाना, सूत एवं ऊन की कताई, बुनाई एवं रंगाई, आभूषण बनाना, मनके बनाना, लकड़ी का सामान विशेष रूप से कृषि संबंधी उपकरण, बैलगाड़ी तथा नौकाएँ बनाना आदि उनके महत्त्वपूर्ण व्यवसाय थे। हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, चन्हुदड़ो, लोथल, धौलावीरा, नागेश्वर बालाकोट आदि शिल्प उत्पादन के महत्त्वपूर्ण केंद्र थे। चन्हुदड़ो की छोटी-सी बस्ती (7 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत) लगभग पूरी तरह शिल्प उत्पादन में लगी हुई थी।
- शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल-
विभिन्न प्रकार के शिल्प उत्पादनों के लिए अनेक प्रकार के कच्चे माल की आवश्यकता थी। उदाहरण के लिए, चिकनी मिट्टी, पकी मिट्टी, ताँबा, टिन, काँसा, सोना, चाँदी, शंख, सीपियाँ, कौड़ियाँ, विभिन्न प्रकार के पत्थर; जैसे-अकीक, नीलम, स्फटिक, क्वार्ज, सेलखड़ी आदि, मिट्टी के बर्तन, सुइयाँ, फयान्स, तकलियाँ मनके, सुगंधित पदार्थ, कपास, सूत, ऊन, विभिन्न प्रकार की लकड़ियाँ, हड्डियाँ, घिसाई, पालिश और छेद करने के औजार आदि विभिन्न शिल्प उत्पादनों के लिए आवश्यक थे। - कच्चा माल प्राप्त करने के स्रोत–
विभिन्न शिल्प उत्पादों के लिए आवश्यक कच्चा माल अनेक उपायों द्वारा प्राप्त किया जाता था। कुछ कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध था, किंतु कुछ जलोढ़क मैदान के बाहर से मँगवाना पड़ता था। इस प्रकार हड़प्पा सभ्यता के लोग शिल्प उत्पादनों के लिए उपमहाद्वीप और बाहर से कच्चा माल अनेक उपायों द्वारा प्राप्त करते थे।
- वस्त्र निर्माण के लिए सूत कपास से प्राप्त किया जाता था। कपास की खेती की जाती थी। ऊनी कपड़ों के निर्माण के लिए ऊन भेड़ों से प्राप्त किया जाता था।
- ईंटों, मिट्टी के बर्तनों, मूर्तियों एवं खिलौनों के लिए चिकनी मिट्टी स्थानीय रूप से उपलब्ध हो जाती थी। चोलीस्तान (पाकिस्तान) और बनावली (हरियाणा) से मिलने वाले मिट्टी के हल साक्षी हैं कि वहाँ उत्तम कोटि की चिकनी मिट्टी मिलती थी।
- हड्डयाँ विभिन्न पशुओं से प्राप्त की जाती थीं। मछलियों की हड्डियाँ मछुआरों से, पक्षियों की हड्डियाँ तथा जंगली पशुओं | की हड्डियों शिकारियों से अथवा स्वयं शिकार करके प्राप्त की जाती थीं।
- लकड़ी के हलों, विभिन्न वस्तुओं, औज़ारों एवं उपकरणों के निर्माण के लिए लकड़ी आस-पास के जंगलों से प्राप्त की | जाती थी। बढ़िया किस्म की लकड़ी मेसोपोटासिया से मँगवाई जाती थी।
- सुगंधित द्रव्यों को बनाने के लिए फयान्स जैसे मूल्यवान पदार्थ मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त किए जाते थे।
- हड़प्पा सभ्यता के लोगों ने उन-उन स्थानों में अपनी बस्तियाँ स्थापित कर ली थीं जिन-जिन स्थानों से आवश्यक कच्चा माल सरलतापूर्वक उपलब्ध हो सकता था। उदाहरण के लिए, इन्होंने नागेश्वर और बालाकोट में, जहाँ से शंख सरलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता था, अपनी बस्तियाँ स्थापित की थीं।
- वे कार्नीलियन मनके गुजरात से, सीसा दक्षिण भारत से और लाजवर्द मणियाँ कश्मीर और अफगानिस्तान से लेते थे।
- उन्होंने सुदूर अफगानिस्तान में शोर्तुघई में अपनी बस्ती स्थापित की क्योंकि यह स्थान नीले रंग के पत्थर यानी लाजवर्द मणि के सबसे अच्छे स्रोत के निकट था। इसी प्रकार लोथल जो कार्नीलियन (गुजरात में भडौंच), सेलखड़ी (दक्षिणी राजस्थान और उत्तरी गुजरात से) एवं धातु (राजस्थान से) के स्रोतों के निकट स्थित था।
- सिंधु सभ्यता के लोग कच्चे माल वाले क्षेत्रों में अभियान भेजकर भी वहाँ से कच्चा माल प्राप्त करते थे। इन अभियानों का प्रमुख उद्देश्य स्थानीय लोगों के साथ संपर्क स्थापित करना होता था। वे अभियान भेजकर राजस्थान के खेतड़ी क्षेत्र से ताँबा और दक्षिण भारत से सोना प्राप्त करते थे।
- हड़प्पाई लोग संभवतः अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर स्थित ओमान से भी ताँबा मँगवाते थे। हड़प्पाई पुरावस्तुओं और ओमानी ताँबे दोनों में निकल के अंशों का मिलना दोनों के साझा उद्भव का परिचायक है। व्यापार संभवतः वस्तु विनिमय के आधार पर किया जाता था। वे बड़ी-बड़ी नावों एवं बैलगाड़ियों पर अपने तैयार माल को पड़ोस के इलाकों में ले जाते थे तथा उनके बदले धातुएँ तथा अन्य आवश्यक सामान ले आते थे। इन क्षेत्रों से जब-तब मिलने वाली हड़प्पाई पुरावस्तुओं से ऐसे संपर्को का संकेत मिलता है।