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प्रश्न
हड़प्पाई समाज में शासकों द्वारा किए जाने वाले संभावित कार्यों की चर्चा कीजिए।
उत्तर
हडप्पा सभ्यता के राजनैतिक संगठन के विषय में निश्चयपूर्वक कुछ भी कहना कठिन है। हमें ज्ञात नहीं है कि हड़प्पा के शासक कौन थे; संभव है वे राजा रहे हों या पुरोहित अथवा व्यापारी। कांस्यकालीन सभ्यताओं में आर्थिक, धार्मिक एवं प्रशासनिक इकाइयों में कोई स्पष्ट भेद नहीं था। एक ही व्यक्ति प्रधान पुरोहित भी हो सकता था, राजा भी हो सकता था और धनी व्यापरी भी। हंटर महोदय यहाँ के शासन को जनतंत्रात्मक शासन मानते हैं किंतु, पिग्गाट और व्हीलर के मतानुसार सुमेर एवं अक्कड़ के समान हड़प्पा में भी पुरोहित राजा शासन करते थे। कुछ विद्वानों के अनुसार हड़प्पा साम्राज्य पर दो राजधानियों-हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से शासन किया जाता था।
कुछ अन्य विद्वानों के अनुसार संभवत: संपूर्ण क्षेत्र अनेक राज्यों, रजवाड़ों में विभक्त था और उनमें से प्रत्येक की एक अलग राजधानी थी; जैसे-सिंधु में मोहनजोदड़ो, पंजाब में हड़प्पा, राजस्थान में कालीबंगन और गुजरात में लोथल। कुछ अन्य विद्वानों के मतानुसार हड़प्पा सभ्यता में अनेक राज्यों का अस्तित्व नहीं था अपितु यह एक राजा के नेतृत्व में एक ही राज्य था। हड़प्पा सभ्यता के शासन का स्वरूप चाहे जो भी हो, इतना तो निश्चित है कि प्रशासन अत्यधिक कुशल एवं उत्तरदायी था। हड़प्पाई समाज में शासकों द्वारा अनेक महत्त्वपूर्ण कार्यों को किया जाता होगा। ऐसा प्रतीत होता है कि शासक राज्य में शांति व्यवस्था को बनाए रखने तथा आक्रमणकारियों से अपने राज्य की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी होता था। हड़प्पा सभ्यता के सुनियोजित नगर, सफाई तथा जल निकास की उत्तम व्यवस्था, अच्छी सड़कें, उन्नत व्यापार, माप-तौल के एकरूप मानक, सांस्कृतिक विकास, विकसित उद्योग-धंधे, संपन्नता आदि सभी इस तथ्य के प्रबल प्रमाण हैं कि हड़प्पा के शासक प्रशासनिक कार्यों में विशेष रुचि लेते थे। संभवतः हड़प्पा के शहरों की योजना में भी राज्य का महत्त्वपूर्ण भाग रहा होगा।
इतिहासकारों का विचार है कि प्राचीन विश्व में जहाँ-जहाँ नियोजित वस्तुओं के प्रमाण मिलते हैं वहाँ-वहाँ इस बात का पता चलती है कि सड़कों की योजना का विकास धीरे-धीरे नहीं हुआ अपितु एक विशेष ऐतिहासिक समय में इसका निर्माण हुआ और अनेक विषयों में बस्ती को फिर से बसाने के कारण ऐसा किया गया। इतिहासकारों का विचार है कि हड़प्पा के शहरों की ईंटों का एक जैसा आकार या तो ‘कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के कारण था या इसलिए कि लोगों को व्यापक पैमाने पर ईंट बनाने । के लिए नियुक्त किया गया होगा। इसी प्रकार, हड़प्पा के विभिन्न स्थानों पर एक ही प्रकार के ताँबे, काँसे और मिट्टी के बर्तन मिलने से भी यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है। इसी प्रकार यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि विभिन्न नगरों की योजना भी राज्य द्वारा बनाई गई होगी और विभिन्न स्थलों पर सड़कों और नालियों के निर्माण का कार्य भी राज्य ने किया होगा। उल्लेखनीय है कि हड़प्पा के शहरी केंद्रों की योजना का अध्ययन करने पर वहाँ की नागरिक व्यवस्थाओं की देख-रेख और एक विशाल जल और निकास व्यवस्था का पता चलता है। निकास के लिए प्रत्येक गली में नाली बनी होती थी।
गली में बनी यह नाली पूरे शहर नियोजन का एक भाग थी। घर अपने-अपने ढंग से अलग-अलग इस कार्य को नहीं कर सकते थे। इसका स्पष्ट तात्पर्य है कि प्रशासन द्वारा स्वयं सभी कार्यों को नियंत्रित किया जाता था तथा इनकी देख-रेख का कार्य किया जाता था। ऐसा लगता है कि शिल्प उत्पादन और वितरण का कार्य भी शासकों द्वारा नियंत्रित होता था; यही कारण था कि कुछ उद्योग विशेष रूप से कम वजन वाले कच्चे माल अथवा ईंधन के स्रोत के निकट स्थित होते थे और कुछ वहाँ स्थित थे जहाँ उनकी खपत सबसे अधिक थी। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे नगरों में विशाल अन्नागारों का मिलना इसका प्रबल प्रमाण है कि हड़प्पाई शासकों को सदैव प्रजाहित की चिंता रहती थी, इसीलिए अनाजे को विशाल अन्नागारों में सुरक्षित रख लिया जाता था ताकि किसी भावी आपात स्थिति में उसका प्रयोग किया जा सके।