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प्रश्न
हिंदी-उर्दू के विषय में लेखक के विचारों को देखिए। आप इन दोनों को एक ही भाषा की दो शैलियाँ मानते हैं या भिन्न भाषाएँ?
उत्तर
हमारा देश भारत एकता का प्रतीक है। हमारे देश में कई भाषाएँ तथा बोलियाँ विद्यमान हैं। हिन्दी, उर्दू, मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी आदि कई भाषाएँ विशेष स्थान रखती हैं। सभी भाषाओं की अलग-अलग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद इन सभी भाषाओं का महत्वपूर्ण स्थान तथा साहित्य में इनका विशेष योगदान रहा है। मुगलों के आगमन के साथ ही भारत में उर्दू भाषा का भी आगमन हुआ। अंग्रेज़ों के समय में आज़ादी पाने के लिए एक ऐसी भाषा के विकास की आवश्यकता हुई, जो जन भाषा बन सके। अतः वह काल संक्रमण का काल था। भरतेन्दु जी ने खड़ी बोली में लिखना आरंभ कर दिया था। उस समय सभी उर्दू के साथ-साथ हिंदी का भी प्रयोग करते थे। अतः इस आधार पर यह कहना सरल होगा कि हिंदी और उर्दू दो अलग-अलग भाषाएँ हैं। उर्दू भाषा हिंदी के साथ रच बस गई है। आज दोनों में अंतर करना बहुत कठिन हो गया है। परन्तु सत्य यही है कि अन्य सभी भाषाओं की तरह ये दोनों अलग हैं और भिन्न शैली की हैं। सभी भाषाओं की तरह दोनों भाषाओं की लिपियाँ भी अलग हैं।
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