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प्रश्न
‘हर बार कुछ सिखाकर ही गई, सबसे बड़ी गुरु है हार’ इस पंक्ति द्वारा आपने जाना .....
उत्तर
कवि ने इन पंक्तियों के जरिए यह दर्शाया है कि जीवन में मिली हार से व्यक्ति को निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि विजय की पहली कड़ी हार ही होती है। हार से बहुत कुछ सिखने को मिलता है, अगर कोई प्रयास करता है। जिसमें कोई त्रुटि होती है, वही हार होती है। जो प्रयास नहीं करता, उसे जीत और हार के बीच का अंतर पता नहीं चलता। जब भी हमें हार का सामना करना पड़ता है, हमें और अधिक तन्मयता से अपनी मंजिल की ओर बढ़ना चाहिए। इसलिए, हार जीवन की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। हार व्यक्ति को यह एहसास दिलाती है कि उसे सही दिशा में और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। हार व्यक्ति को साहसी और निडर बनाती है। हमें हर हार के लिए आभारी होना चाहिए, क्योंकि हार हमें प्रेरणा देती है और अधिक प्रयास करने की उम्मीद जगाती है। हार एक गुरु की भांति व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है।
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बहार
संजाल पूर्ण कीजिएः
उचित जोड़ मिलाइए:
अ | आ | |
i) | इन्हें अपनाना नही | तकदीर का प्रहार |
ii) | इन्हें पार करना | वृक्षों की छाया |
iii) | इन्हें सहना | तपती धूप |
iv) | इससे परे रहना | पर्वत |
फूलों के रास्ते |
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:
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