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इस अध्याय की भूमिका को एक बार फिर पढ़िए। आपको ऐसा क्यों लगता है कि बदले की भावना इस समस्या से निपटने का सही रास्ता नहीं हो सकती? अगर सारे समूह बदले के रास्ते पर चल पड़े तो क्या होगा? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

इस अध्याय की भूमिका को एक बार फिर पढ़िए। आपको ऐसा क्यों लगता है कि बदले की भावना इस समस्या से निपटने का सही रास्ता नहीं हो सकती? अगर सारे समूह बदले के रास्ते पर चल पड़े तो क्या होगा?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों पर अत्याचार किया। अब यहूदी धर्म को मानने वाले इजरायल में मुसलमानों और ईसाई अल्पसंख्यकों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। यह एक प्रकार के बदले की भावना है जो इस समस्या से निपटने का सही तरीका नहीं है। अगर सारे समूह बदले के रास्ते को अपना लें तो पूरे विश्व में अफरातफरी फैल जाएगी। यह अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेगा। विभिन्न समूहों के बीच परस्पर सहयोग एवं सामंजस्य की भावना समाप्त हो जाएगी।

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अध्याय 2: धर्मनिरपेक्षता की समझ - पाठ में [पृष्ठ १९]

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एनसीईआरटी Civics [Hindi] Class 8
अध्याय 2 धर्मनिरपेक्षता की समझ
पाठ में | Q 1 | पृष्ठ १९
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