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इस शताब्दी के एक महान भौतिकविद् (पी. ए. एम. डिरैक) प्रकृति के मूल स्थिरांकों (नियतांकों) के आंकिक मानों के साथ क्रीड़ा में आनन्द लेते थे। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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प्रश्न

इस शताब्दी के एक महान भौतिकविद् (पी. ए. एम. डिरैक) प्रकृति के मूल स्थिरांकों (नियतांकों) के आंकिक मानों के साथ क्रीड़ा में आनन्द लेते थे। इससे उन्होंने एक बहुत ही रोचक प्रेक्षण किया। परमाणवीय भौतिकी के मूल नियतांकों (जैसे इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, प्रोटॉन का द्रव्यमान तथा गुरुत्वीय नियतांक G) से उन्हें पता लगा कि वे एक ऐसी संख्या पर पहुँच गए हैं जिसकी विमा समय की विमा है। साथ ही, यह एक बहुत ही बड़ी संख्या थी और इसका परिमाण विश्व की वर्तमान आकलित आयु (~1500 करोड़ वर्ष) के करीब है। इस पुस्तक में दी गई मूल नियतांकों की सारणी के आधार पर यह देखने का प्रयास कीजिए कि क्या आप भी यह संख्या (या और कोई अन्य रोचक संख्या जिसे आप सोच सकते हैं) बना, सकते हैं? यदि विश्व की आयु तथा इस संख्या में समानता महत्त्वपूर्ण है तो मूल नियतांकों की स्थिरता किस प्रकार प्रभावित होगी?

संख्यात्मक

उत्तर

निर्वात का परावैद्युतांक   `ε_0  = 8.854 xx 10^-12 "c"^2"m"^-2"N"^-1`

तथा निर्वात की चुंबकशीलता `mu_0 = 1.257 xx 10^-6  "N amp"^-2`

∴ `1/(mu_0ε_0) = 1/(1.257 xx 10^-6  "N  amp"^-2 xx 8.854 xx 10^-12 "c"^2"m"^-2 "N"^-1)`

= `(100 xx 10^16)/11.12  "m"^2"s"^-2`

= `8.99 xx 10^16  "m"^2"s"^-2`

∴ वर्गमूल लेने पर,

`1/(sqrt(mu_0 xx ε_0)) = 2.99 xx 10^8  "m"  "s"^-1 ≈ 3 xx 10^8 "m" "s"^-1` = प्रकाश की चाल

इस प्रकार `1/(sqrt(mu_0 xx ε_0))` की विमा, चाल की विमा के समान है तथा आंकिक मान निर्वात में प्रकाश की चाल के बराबर है।

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द्रव्यमान का मापन
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अध्याय 2: मात्रक और मापन - अभ्यास [पृष्ठ ३८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Physics [Hindi] Class 11
अध्याय 2 मात्रक और मापन
अभ्यास | Q 2.33 | पृष्ठ ३८

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जिस प्रकार विज्ञान में परिशुद्ध मापन आवश्यक है, उसी प्रकार अल्पविकसित विचारों तथा सामान्य प्रेक्षणों को उपयोग करने वाली राशियों के स्थूल आकलन कर सकना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। उस उपाय को सोचिए जिनके द्वारा आप निम्नलिखित का अनुमान लगा सकते हैं-(जहाँ अनुमान लगाना कठिन है वहाँ राशि की उपरिसीमा पता लगाने का प्रयास कीजिए)

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जिस प्रकार विज्ञान में परिशुद्ध मापन आवश्यक है, उसी प्रकार अल्पविकसित विचारों तथा सामान्य प्रेक्षणों को उपयोग करने वाली राशियों के स्थूल आकलन कर सकना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। उस उपाय को सोचिए जिनके द्वारा आप निम्नलिखित का अनुमान लगा सकते हैं-(जहाँ अनुमान लगाना कठिन है वहाँ राशि की उपरिसीमा पता लगाने का प्रयास कीजिए)।

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जिस प्रकार विज्ञान में परिशुद्ध मापन आवश्यक है, उसी प्रकार अल्पविकसित विचारों तथा सामान्य प्रेक्षणों को उपयोग करने वाली राशियों के स्थूल आकलन कर सकना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। उस उपाय को सोचिए जिनके द्वारा आप निम्नलिखित का अनुमान लगा सकते हैं-(जहाँ अनुमान लगाना कठिन है वहाँ राशि की उपरिसीमा पता लगाने का प्रयास कीजिए)।

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