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‘जीवन में डर की जगह सावधानी एवं साहस चाहिए’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए। - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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प्रश्न

‘जीवन में डर की जगह सावधानी एवं साहस चाहिए’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

जीवन समस्याओं और संघर्षों से भरा पड़ा है। हर कोई अपने अस्तित्व की रक्षा करने में जुटा है। साहस का जीवन सबसे उत्तम जीवन है। साहसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होती है कि वह बिलकुल निडर और बेखौफ होता है। जो व्यक्ति किसी भी निश्चय के समय किसी डर के कारण साहस से काम नहीं लेता, उसे अपने डर के लिए जीवन भर पछताना पड़ता है। जीवन में हर स्तर पर सफलता प्राप्त करने की चाह प्रत्येक मनुष्य में होती है और वह इसे प्राप्त करने का प्रयास भी करता है। रपोक प्रकृति के कायर, भयभीत, आशंकाग्रस्त व्यक्ति अवसर मिलने पर भी असमंजस की स्थिति में पड़े रहते हैं और एक अच्छे अवसर से हाथ धो बेठते हैं। कई बार जीवन में महत्त्वूर्ण निर्णय लेते समय अधिकांश लोग उसके भावी परिणामों के बारे में सोचकर डर जाते हैं। साहस और डर वास्तव में एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। साहस का अर्थ डर का न होना नहीं है, बल्कि डर को जीत लेना है। वे इस डर के कारण स्वयं ही स्वयं को सफलता से दूर ढकेल देते हैं। सूझ-बूझ, उत्साह व जोश की कमी तथा साहसिक कदम न उठा पाने के कारण वे अपनी मंजिल से कोसों दूर हो जाते हैं। कोई भी ऐसा प्राणी नहीं है, जो खतरे का सामना करते हुए डरता न हो। साहस की सबसे महत्त्वपूर्ण पहचान यह है कि डर का अनुभव होने के बावजूद व्यक्ति वहीं करता है, जो उचित है।अत: हमें अपने जीवन में चुनौतियों को स्वीकार करते हुए बिना डरे उससे संघर्ष करना चाहिए। कहते हैं कि डर का मुकाबला करने पर ही हमें सफलता मिलती है। साहस में इतनी शक्ति होती है कि व्यक्ति दुनिया को बदल दे। अत: हमें डर का त्याग करके सावधानी और साहसपूर्वक अपने जीवन के मार्ग पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

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दो गजलें
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अध्याय 2.4: दो गजलें - स्वाध्याय [पृष्ठ ४३]

APPEARS IN

बालभारती Hindi (Composite) - Lokvani Class 10 Maharashtra State Board
अध्याय 2.4 दो गजलें
स्वाध्याय | Q (६) | पृष्ठ ४३

संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

यहाँ हर शख्स हर पल हादिसा होने से डरता है,
'खिलौना है जो मिट्टी का, फना होने से डरता है।
मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम-सा बच्चा,
बड़ों की देखकर दुनिया बड़ा होने से डरता है।
न बस में जिंदगी इसके, न काबू मौत पर इसका,
'मगर इन्सान फिर भी कब खुदा होने से डरता है।
अजब ये जिंदगी की कैद है, दुनिया का हर इन्साँ,
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता है।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए :  (2)

(2) अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

यहाँ हर शख्स हर पल हादिसा होने से डरता है,
खिलौना है जो मिट्टी का, फना होने से डरता है।
मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा
बड़ों को देखकर दुनिया बड़ा होने से डरता है।
न बस में जिंदगी इसके, न काबू मौत पर इसका,
मगर इन्सान फिर भी कब खुदा होने से डरता है।
अजब ये जिंदगी की कैद है, दुनिया का हर इन्सान,
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता है।

(1) कृति पूर्ण कीजिए -  (2)

जीवन की विशेषताएँ
1. ______
2. ______
3. ______
4. ______

(2) अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


कृति पूर्ण कीजिए:


संजाल पूर्ण कीजिए:


कृति में दिए गजल में प्रयुक्त शब्‍दों की उचित जोड़ियाँ क्रमशः अ और आ तालिका में लिखिए:

 आ
______ ______
______ ______
______ ______
______ ______

अजब ये जिंदगी की ______ है।


रिहाई माँगता है और ______ होने से डरता है।


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