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जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाओं की विवेचना कीजिए। - Geography (भूगोल)

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प्रश्न

जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाओं की विवेचना कीजिए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत-यह सिद्धांत हमें बताता है कि जैसे-जैसे समाज ग्रामीण, खेतिहर और अशिक्षित अवस्था से उन्नति करके नगरीय, औद्योगिक और साक्षर बनता जाता है तो उस प्रदेश की जनसंख्या उच्च जन्म व उच्च मृत्युदर से निम्न जन्म तथा निम्न मृत्युदर की ओर अग्रसर होती जाती है। इन परिवर्तनों की तीनों अवस्थाओं को जनांकिकीय चक्र के रूप में जाना जाता है।

  1. प्रथम अवस्था इस अवस्था में उच्च प्रजननशीलता व उच्च मर्त्यता देखी जाती है, क्योंकि लोग महामारियों व भोजन की अनिश्चित आपूर्ति से होने वाली मृत्युओं की क्षतिपूर्ति अधिक पुनरुत्पादन से करते हैं। इस अवस्था में जीवन प्रत्याशा (किसी व्यक्ति के जीने की आशा) निम्न होती है। अधिकांश लोग सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के कारण अशिक्षित होते हैं। प्रौद्योगिकी का स्तर निम्न अथवा आदिम होता है। अधिकांश लोग प्राथमिक क्रियाओं में लगे होते हैं। कृषि कार्य मुख्य व्यवसाय होता है तथा आखेट, वस्तु संग्रहण वनों से मिलने वाले उत्पादों का संग्रहण व पारिवारिक कार्य जैसे-चटाई बुनना, टोकरी बनाना, मिट्टी के बर्तन बनाना, शहद व लकड़ी एकत्रित करना, पशुपालन, लकड़ी की वस्तुएँ बनाना व लोहार का कार्य आदि व्यवसायों से धनोपार्जन करते हैं। अब से 200 वर्ष पहले तक सभी देश व समाज इसी अवस्था में थे।
  2. द्वितीय अवस्था – इस अवस्था में प्रजननशीलता उच्च बनी रहती है। यद्यपि समय के साथ-साथ यह घटती जाती है। इस अवस्था में मृत्युदर का कम होना महत्त्वपूर्ण पक्ष होता है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार व स्वच्छता के स्तर में सुधार से मर्त्यता (मृत्युदर) में कमी आती है। लोगों का रुझान शिक्षा की ओर होने लगता है तथा तकनीकी विकास का प्रारंभ होने से लोगों में महामारियों से लड़ने का जज्बा विकसित होने व पौष्टिक भोजन के कारण यह परिवर्तन होता है। यह अवस्था विकासशील देशों में देखने को मिलती है। इन देशों में वृद्धि दर ऊँची होती है जिसका कारण उच्च जन्मदर तथा घटती मृत्युदर है।
    तृतीय अवस्था – इस अवस्था में प्रजननशीलता और मृत्युदर (मर्त्यता) दोनों ही तेजी से घट जाती हैं। इसलिए जनसंख्या या तो स्थिर हो जाती है या मंद गति से बढ़ती है, विकसित राष्ट्रों में जहाँ अधिकांश जनसंख्या शिक्षित है तथा प्रौद्योगिकी के विकास का स्तर बहुत ऊँचा है। अधिकांश जनसंख्या द्वितीय व तृतीयक आर्थिक क्रियाओं में लगी है। कृषि व अन्य प्राथमिक क्रियाओं में बहुत कम लोग लगे हैं। उनमें भी सभी कार्य मशीनों से किए जाते हैं। जीवनयापन का स्तर बहुत ऊँचा है। ऐसी जनसंख्या विचारपूर्वक परिवार के आकार को नियंत्रित करती है। अतः यहाँ जनसंख्या की वृद्धि दर बहुत निम्न है। इस दर पर कुछ विकसित राष्ट्रों को अपनी जनसंख्या दोगुनी करने में 318 वर्ष लगेंगे तो कुछ कभी भी इसे दोगुनी नहीं कर पाएंगे।
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जनांकिकीय संक्रमण
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अध्याय 2: विश्व जनसंख्या - वितरण, घनत्व और वृद्धि - अभ्यास [पृष्ठ १५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Fundamentals of Human Geography [Hindi] Class 12
अध्याय 2 विश्व जनसंख्या - वितरण, घनत्व और वृद्धि
अभ्यास | Q 4. (ii) | पृष्ठ १५
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