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‘जो हम शौक से करना चाहते हैं, उसके लिए रास्‍ते निकाल लेते हैं,’ इसका सोदाहरण अर्थ लिखिए। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

‘जो हम शौक से करना चाहते हैं, उसके लिए रास्‍ते निकाल लेते हैं,’ इसका सोदाहरण अर्थ लिखिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

किसी काम को करने की यदि हमारी इच्छा नहीं है, तो वह काम कभी पूरा नहीं होगा। इसके विपरीत यदि कठिन काम भी हम शौक से शुरू करते हैं, तो भी उसे पूरा करने का रास्ता निकाल लेते हैं। संसार में इसके बहुत सुंदर उदाहरण मिलते हैं। हमारे भारत के 'मिसाइल मैन' के नाम से मशहूर डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को सभी जानते हैं। वे बहुत गरीब परिवार से थे। उन्होंने जीवन में बहुत सारी मुसीबतें देखीं और उनका सामना किया, लेकिन अपने लक्ष्य से कभी नहीं भटके। इच्छाशक्ति व परिश्रम के बल पर सफलता प्राप्त की। महान आविष्कारक थॉमस एडीसन को कमजोर दिमाग के चलते स्कूल से निकाल दिया गया। कई बार असफलताएँ उनके हाथ लगीं, लेकिन अंतत: उन्होंने बल्ब का आविष्कार किया। एक विशालकाय पर्वत जिसे देखकर ही पसीने छूट जाते हैं, उसे एक साधारण से आदमी दशरथ माँझी ने अपनी प्रबल इच्छा के बल पर चीर दिया। आजादी की लड़ाई की लोगों को ऐसी लगन लगी कि लोगोंने अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। मदर टेरेसा को गरीबों की सेवा करने का शौक पैदा हुआ, जिसे उन्होंने पूरा भी किया। इस विश्व में अनगिनत लोग हुए, जिन्होंने अपने शौक को पूरा करने के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया और अंतत: सफलता का स्वाद भी चखा। इससे सिद्ध होता है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो और काम के प्रति लगन अर्थात शौक हो, तो मुश्किलें स्वयं ही रास्तों से हट जाती हैं और मंजिल खुद-ब-खुद कदम चूमती है।

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खुला आकाश
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अध्याय 1.07: खुला आकाश (पूरक पठन) - अभिव्यक्ति [पृष्ठ ३०]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Lokbharati 10 Standard SSC Maharashtra State Board
अध्याय 1.07 खुला आकाश (पूरक पठन)
अभिव्यक्ति | Q (१) | पृष्ठ ३०

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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

         जिस गली में आजकल रहता हूँ – वहाँ एक आसमान भी है लेकिन दिखाई नहीं देता। उस गली में पेड़ भी नहीं हैं, न ही पेड़ लगाने की गुंजाइश ही है। मकान ही मकान हैं। इतने मकान कि लगता है मकान पर मकान लदे हैं। लंद-फंद मकानों की एक बहुत बड़ी भीड़, जो एक सँकरी गली में फँस गई और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। जिस मकान में रहता हूँ, उसके बाहर झाँकने से 'बाहर' नहीं सिर्फ दूसरे मकान और एक गंदी व तंग गली दिखाई देती है। चिड़ियाँ दिखती हैं, लेकिन पेड़ों पर बैठीं या आसमान में उड़तीं हुई नहीं। बिजली या टेलीफोन के तारों पर बैठी, मगर बातचीत करतीं या घरों के अंदर यहाँ-वहाँ घोंसले बनाती नहीं दिखतीं।

1. लिखिए: (2)

गद्यांश में उल्लेखित चिड़ियों की विशेषताएँ –

  1. ____________
  2. ____________

2. 'पक्षियों की घटती संख्या' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)


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