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प्रश्न
“जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोइ तू फूल।” इस पंक्ति का भाव पल्लवन कीजिए।
उत्तर
महान व्यक्ति वही होता है जो उपकार करने वाले व्यक्ति के लिए भी ईर्ष्या, वैर की भावना नहीं रखता। निन्दक को भी गले लगाना उपकारी पर उपकार करना मनुष्य की महानता के लक्षण हैं। अहित करने वाले का हित सोचना, अपने मार्ग में काँटे बिछाने वाले के लिए फूल बिछाना, क्षमा करना महान मानवीय गुण हैं। कोई हमारी सफलता, प्रगति या शुभ काम में बाधा या विघ्न खड़ा करे या शत्रुता का भाव रखे, वैसा व्यवहार करे हमें उसके प्रति नम्र रहना चाहिए, मधुर व्यवहार करना चाहिए।
हमारी नम्रता, सद्भाव और मधुरता हमारे जीवन में सुगंध भरेंगे। यह व्यवहार हमारे पुण्य को बढ़ाएगा, प्रचुर अर्थ प्रदान करेगा।
कुछ व्यक्ति हमेशा ईंट का जवाब पत्थर से देते हैं। ऐसे व्यक्ति बैठै-बिठाए ही आफत मोल लेते हैं और एक-दूसरे के प्रति दूरियाँ निर्माण होती हैं। यदि कहीं आग लगती है तो उसे बुझाने का प्रयास करना चाहिए न कि आग को फूँक देकर और ज्यादा भड़काया जाय। जो व्यक्ति दूसरों की राह में काँटे बोते हैं, उनका खुद का विवेक नष्ट हो जाता है। ईर्ष्या और द्वेष की अग्नि से खुद भी जलते हैं और दूसरों को भी जलाते हैं। प्रेम करना तो सबसे अच्छा है। परंतु वैर करना किसी के साथ भी अच्छा नहीं है। क्योंकि किसी के साथ वैर करने से मनुष्य की हमेशा हानि होती है और लाभ शुन्य होता है। कटुता रखने से कटुता कभी खत्म नहीं होती। वैर-भाव रखने से वैर कम नहीं होता वह बढ़ता ही रहता है। यदि कोई आप पर क्रोध करता है तो आप उसके ऊपर शांति का जल डालिए, यदि कोई अहंकार से भरा हुआ आपके सामने आता है, तो आप नम्र भाव से उसे देखिए, उसके साथ सरलता का व्यवहार कीजिए। ऐसा करने से क्रोधी व्यक्ति का क्रोध और अभिमानी व्यक्ति का अभिमान दूर हो जाएगा। जो हमारे लिए बुरा करता है, उसका भला करें। उसके मार्ग में काँटे दूर करके वहाँ फूल बिछा दें। भला करनेवाला, फूल बिछानेवाला सदैव अच्छा ही जीवन पाता है। काँटे बिछानेवाले, स्वयं ही उसमें उलझकर घायल हो जाते हैं। अत: हमें अपना व्यवहार सदैव विनम्र रखना चाहिए। दूसरों के लिए हमें सदैव मन में अच्छा ही भाव रखना चाहिए।
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