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प्रश्न
जोड़ियाँ मिलाइए :
अ | उत्तर | आ |
जलधि | ______ | दुख |
पुतले | ______ | उपेक्षाएँ |
रेखाएँ | ______ | नाद |
यौवन | ______ | चमकीले |
जोड़ियाँ मिलाइएँ
उत्तर
अ | उत्तर |
जलधि | नाद |
पुतले | चमकीले |
रेखाएँ | दुख |
यौवन | उपेक्षाएँ |
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चिंता
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लिखिए :
लिखिए :
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कविता (चिंता) की अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में,
भोले थे, हॉं तिरते केवल सब विलासिता के नद में।
वे सब डूबे, डूबा उनका विभव, बन गया पारावर
उमड़ रहा था देव सुखों पर दुख जलधि का नाद अपार’’
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर "चिंता" कविता का पद्य विश्लेषण कीजिए:
- रचनाकार का नाम
- रचना की विधा
- पसंदीदा पंक्ति
- पसंद होने का कारण
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