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प्रश्न
कारण देते हुए स्पष्ट कीजिए।
संक्रमण धातुएँ तथा उनके अधिकांश यौगिक अनुचुंबकीय हैं।
उत्तर
पदार्थों में अनुचुंबकत्व की उत्पत्ति, अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होती है। प्रतिचुंबकीय पदार्थ वे होते हैं जिनमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं। संक्रमण धातु आयनों में प्रतिचुंबकत्व तथा अनुचुंबकत्व दोनों होते हैं अर्थात् इनमें दो विपरीत प्रभाव पाए जाते हैं, इसलिए परिकलित चुंबकीय आघूर्ण इनका परिणामी चुंबकीय आघूर्ण माना जाता है। d0 (Sc3+, Ti4+) या d10 (Cu+, Zn2+) विन्यासों को छोड़कर, संक्रमण धातुओं के सभी सरल आयनों में इनके (n – 1)d उपकोशों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं; अत: ये अधिकांशत: अनुचुंबकीय होते हैं। ऐसे अयुग्मित इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण, प्रचक्रण कोणीय संवेग तथा कक्षीय कोणीय संवेग से संबंधित होता है। प्रथम संक्रमण श्रेणी की धातुओं के यौगिकों में कक्षीय कोणीय संवेग को योगदान प्रभावी रूप से शमित (quench) हो जाता है, इसलिए इसका कोई महत्त्व नहीं रह जाता।
अत: इनके लिए चुंबकीय आघूर्ण का निर्धारण उसमें उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर किया जाता है तथा इसकी गणना निम्नलिखित ‘प्रचक्रण मात्र’ सूत्र द्वारा की जाती है।
μ = `sqrt("n"("n" + 2))`
यहाँ n अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है तथा II चुंबकीय आघूर्ण है जिसका मात्रक बोर मैग्नेटॉन (BM) है। अतः एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण 1.73 BM होता है।
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