हिंदी

कार्य कुशलता पर जाति प्रथा का प्रभाव विषय पर समूह में चर्चा कीजिए। चर्चा के दौरान उभरने वाले बिंदुओं को लिपिबद्ध कीजिए। - Hindi (Core)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

कार्य कुशलता पर जाति प्रथा का प्रभाव विषय पर समूह में चर्चा कीजिए। चर्चा के दौरान उभरने वाले बिंदुओं को लिपिबद्ध कीजिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

कार्य कुशलता पर जाति प्रथा का विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। यह आवश्यक नहीं है कि एक चित्रकार का बेटा अच्छा चित्रकार हो या एक व्यापारी का बेटा अच्छा व्यापारी हो। हर व्यक्ति की अपनी जन्मजात योग्यता तथा क्षमता होती हैं। एक चित्रकार का बेटा अच्छा व्यापारी बन सकता है और एक व्यवसायी का बेटा अच्छा चित्रकार। अतः हमें यह अधिकार होना चाहिए कि व्यक्ति को उसकी कार्य कुशलता के आधार पर पेशे चुनने का अधिकार हो। न कि जाति प्रथा के आधार पर किसी मनुष्य का पेशा निर्धारित किया जाए। जाति प्रथा ने लंबे समय तक लोगों का शोषण ही नहीं किया है बल्कि उनकी योग्यताओं तथा क्षमताओं का भी गला घोंटा है। यह उचित नहीं है।
shaalaa.com
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 18: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज) - अभ्यास [पृष्ठ १५७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 12
अध्याय 18 बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज)
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ १५७

संबंधित प्रश्न

जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आंबेडकर के क्या तर्क हैं?


जाति-प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी व भुखमरी का भी एक कारण कैसे बनती जा रही है? क्या यह स्थिति आज भी है?


लेखक के मत से 'दासता' की व्यापक परिभाषा क्या है?


शारीरिक वंश-परंपरा और सामाजिक उत्तराधिकार की दृष्टि से मनुष्यों में असमानता संभावित रहने के बावजूद आंबेडकर 'समता' के एक व्यवहार्य सिद्धांत मानने का आग्रह क्यों करते हैं? इसके पीछे उनके क्या तर्क हैं?

सही में आंबेडकर ने भावनात्मक समत्व की मानवीय दृष्टि के तहत जातिवाद का उन्मूलन चाहा है, जिसका प्रतिष्ठा के लिए भौतिक स्थितियों और जीवन-सुविधाओं का तर्क दिया गया है। क्या इससे आप सहमत हैं?

आंबेडकर ने जाति प्रथा के भीतर पेशे के मामले में लचीलापन न होने की जो बात की है- उस संदर्भ में शेखर जोशी की कहानी 'गलता लोहा' पर पुनर्विचार कीजिए।

जाति प्रथा को श्रम विभाजन का ही एक अंग न मानने के पीछे डॉ. आंबेडकर के क्या तर्क थे?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×