हिंदी

‘काश, कोई तो होता जो मेरी भावनाओं को गभीरता से समझ पाता। अफसोस, ऐसा व्यक्ति मुझे अब तक नहीं मिला .। ” क्या आपको लगता है कि ऐन के इस कथन में उसके डायरी-लेखन का कारण छिपा हैं? - Hindi (Core)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘काश, कोई तो होता जो मेरी भावनाओं को गभीरता से समझ पाता। अफसोस, ऐसा व्यक्ति मुझे अब तक नहीं मिला। ” क्या आपको लगता है कि ऐन के इस कथन में उसके डायरी-लेखन का कारण छिपा हैं?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

ऐन एक साधारण लड़की थी। वह अपनी पढ़ाई सामान्य ढंग से करती थी, परंतु उसे सबसे अक्खड़ माना जाता था। उसे हर समय डाँट-फटकार सहनी पड़ती थी। वह एक जगह लिखती भी है-“मेरे दिमाग में हर समय इच्छाएँ, विचार, आशय तथा डॉट-फटकार ही चक्कर खाते रहते हैं। मैं सचमुच उतनी घमंडी नहीं हूँ जितना लोग मुझे समझते हैं। मैं किसी और की तुलना में अपनी नयी कमजोरियों और खामियों को बेहतर तरीके से जानती हूँ।” एक अन्य स्थान पर वह लिखती है-“लोग मुझे अभी भी इतना नाकघुसेड़ और अपने आपको तीसमारखाँ समझने वाली क्यों मानते हैं?” वह यह भी लिखती है-“कोई मुझे नहीं समझता” इस प्रकार ऐन की टिप्पणियों से पता चलता है कि अज्ञातवास में उसे समझने वाला कोई नहीं था।

वह स्वयं को बदलने की कोशिश करती थी, परंतु फिर किसी-न-किसी के गुस्से का शिकार हो जाती थी। उपदेशों, हिदायतों से वह उकता चुकी थी तथा अपनी भावनाएँ ‘किट्टी’ नामक गुड़िया के माध्यम से व्यक्त की। हर मामले पर उसकी अपनी सोच है चाहे वह मिस्टर डसेल का व्यक्तित्व ही या महिलाओं के संबंध में विचार। अकेलेपन के कारण ही उसने डायरी में अपनी भावनाएँ लिखीं।

shaalaa.com
डायरी के पन्ने
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 4: डायरी के पन्ने (ऐन फैंक) - अभ्यास [पृष्ठ ७७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Vitaan Class 12
अध्याय 4 डायरी के पन्ने (ऐन फैंक)
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ ७७

संबंधित प्रश्न

‘यह साठ लाख लोगों की तरफ से बोलने वाली एक आवाज हैं। एक ऐसी आवाज, जो नहीं, बल्कि एक साधारण लड़की की हैं।” इल्या इहरनबुर्ग की इस टिप्पणी के सदर्भ में पठित अशों पर विचार करें।


‘प्रकृति-प्रदत्त प्रजनन-शक्ति के उपयोग का अधिकार बच्चे पैदा करें या न करें अथवा कितने बच्चे पैदा करें-इस की स्वतत्रता स्त्री सी छीनकर हमारी विश्व-व्यवस्था न न सिर्फ स्त्री की व्यक्तित्व-विकास के अनक अवसरों से वचित किया है बल्कि जनाधिक्य की समस्या भी पैदा की हैं।’ ऐन की डायरी के 13 जून, 1944 के अश में व्यक्त विचारों के सदर्भ में इस कथन का औचित्य ढूंढ़े।


“ऐन  की डायरी अगर एक एतिहासिक शेर का जीवत दस्तावेज है, तरे साथ ही उसके निजी सुख-दुख और भावनात्मक उथलपुथल का र्भा। इन मुष्ठा’ में दानी’ का फ़र्क मिट गया तो ” हस कथन पर विचार करतै हुए अपनी सहमति या असहमति तर्कपूवंक व्यक्त करों।


ऐन ने अपनी डायरी ‘किट्टी’ (एक निजीव गुड़िया) को सबोधित चिट्ठी की शक्ल में लिखने की जरूरत क्यों महसूस की होगी?


इसे भी जानें
नाजी दस्तावेजों के पाँच करोड़ पन्नों में ऐन फ्रैंक का नाम केवल एक बार आया है लेकिन अपने लेखन के कारण आज ऐन हजारों पन्नों में दर्ज हैं जिनका एक नमूना यह खबर भी है-


एन फ्रैंक की डायरी किट्टी को संबोधित कर ही क्यों लिखी गई है ? यह डायरी वह किसी अपने को भी संबोधित कर सकती थी ?तर्क सहित उत्तर दीजिए।


“काश, कोई तो होता जो मेरी भावनाओं को गम्भीरता से समझ पाता। अफसोस, ऐसा व्यक्ति मुझे अब तक नहीं मिला।” एन फ्रैंक की इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×