'आत्मत्राण' कविता के अनुसार, मनुष्य को अपने साहस और पुरुषार्थ पर भाग्य से अधिक भरोसा रखना चाहिए। कवि विपत्तियों से बचने की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि वह ईश्वर से यह शक्ति मांगता है कि वह विपत्तियों का निडरता से सामना कर सके। कवि चाहता है कि उसे हर कठिनाई में आत्मबल और धैर्य मिले, ताकि किसी भी स्थिति में उसका साहस और पौरुष न डगमगाए। वह दुखों पर विजय पाने की क्षमता की कामना करता है और विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास बनाए रखने का संदेश देता है।
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प्रश्न
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:
मनुष्य को अपने साहस और पुरुषार्थ पर भाग्य से अधिक भरोसा रखना चाहिए। 'आत्मत्राण' कविता के आधार पर सिद्ध कीजिए।
लघु उत्तरीय
उत्तर
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