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प्रश्न
कैलिफोर्निया में चार लोगों के बीच 1880 में हुई किसी मुलाकात की कल्पना कीजिए। ये चार लोग हैं : एक अफ्रीकी गुलाम, एक चीनी मज़दूर, गोल्ड रश के चक्कर में आया हुआ एक जर्मन और होपी कबीले का एक मूल निवासी। उनकी बातचीत का वर्णन कीजिए।
उत्तर
कैलीफ़ोर्निया संयुक्त राज्य अमरीका का एक महत्त्वपूर्ण राज्य है। यहाँ 1880 में जोसेफ नामक एक अफ्रीकी गुलाम, ली-तुंग नामक एक चीन का मज़दूर, एक जर्मन व्यापारी विलियम और होपी कबीले का बॉब नामक एक मूल निवासी आस-पास ही रहते थे। किसी समय अमरीकी महाद्वीप में अफ्रीका से लाए गए गुलामों की संख्या बहुत अधिक थी। 1750 ई० में कुछ लोगों के पास अनुमानतः हज़ार-हज़ार की संख्या में गुलाम होते थे। लेकिन 1861 ई० में संयुक्त राज्य अमरीका में दास प्रथा को समाप्त कर दिए जाने के परिणामस्वरूप जोसेफ स्वतंत्र नागरिक बन चुका था। ली-तुंग के पूर्वज भी बहुत समय पहले संयुक्त राज्य अमरीका में आ गए थे। विलियम ‘गोल्ड रश’ के दौरान कैलीफ़ोर्निया आया था। यह उल्लेखनीय है कि उत्तरी अमरीका की धरती के नीचे सोना होने का अनुमान पहले से ही लगाया जाता था। सन् 1840 ई० में कैलीफ़ोर्निया में यूरोपीय वहाँ हजारों की संख्या में पहुँच गए। विलियम ऐसे यूरोपियों में से एक था। बॉब के पूर्वज दीर्घकाल से कैलीफ़ोर्निया में रह रहे थे। ये चारों एक-दूसरे को जानते थे। चारों में प्रायः बातचीत होती रहती थी और कभी-कभी रविवार को उनकी मुलाकात भी हो जाती थी। यहाँ प्रस्तुत है उनकी एक मुलाकात में होनी वाली बातचीत का वर्णन है।
- अफ्रीकी गुलाम जोसेफ –विलियम साहिब, आप बहुत ही नेकदिल और सज्जन हैं। हम जानते हैं कि आप 1845 ई० में कैलीफ़ोर्निया पधारे थे। ईश्वर की कृपा है कि आपने अपनी मेहनत और ईमानदारी से सोने के व्यापार में अच्छा लाभ कमाया है। आपका घर महल जैसा है और आपके पास सभी सुख-सुविधाएँ भी हैं। यह आपकी महानता है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद भी आप हमें जब-तब दावत पर बुला लेते हैं और हमारी इतनी खातिरदारी भी करते हैं। सचमुच, आप एक महान इनसान हैं।
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चीनी मज़दूर ली-तुंग –
मैं भी जोसेफ के विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ। विलियम साहब सही में महान इनसान हैं। उन्हें धन का कोई गरूर नहीं है अन्यथा रेल विभाग में एक मज़दूर का काम करने वाले तुंग जैसे व्यक्ति को आज के जमाने में पूछता कौन है। नि:संदेह आज के जमाने में विलियम साहब जैसा नेक इनसान दुर्लभ है।
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एक मूल निवासी बॉब –
मेरे पास तो विलियम साहब की इंसानियत का बखान करने के लिए शब्द ही नहीं हैं। मेरी पत्नी अस्थमा की मरीज है। एक दिन अचानक उसकी तबीयत बहुत खराब हो गई। उसे फ़ौरन अस्पताल ले जाना जरूरी था। किंतु मेरे पास न तो पैसा था और न गाड़ी। तभी विलियम साहब भगवान बनकर आ पहुँचे। वे अपनी गाड़ी में मेरी पत्नी को अस्पताल ले गए और उन्होंने बिना बताए उसके इलाज के लिए पैसे भी जमाकर दिए। यह सत्य है कि मेरी पत्नी को उन्हीं की कृपा से नया जीवन मिला। मेरा परिवार विलियम साहब का यह एहसान जीवन भर कभी नहीं भूल सकता। -
जर्मन व्यापारी विलियम –आप लोग इतनी अधिक प्रशंसा करके कृपया मुझे शर्मिंदा ने कीजिए। मुझे जर्मनी छोड़कर कैलीफोर्निया आए हुए लगभग 40 वर्ष बात चुके हैं। उस समय मैं बीस साल का नौजवान था और अब मेरे पैर कब्र की तरफ बढ़ रहे हैं। आपके प्यार के कारण अब मैं जर्मनी में रहने वाले अपने संबंधियों तक को भूल गया हूँ। अब तो आप सब ही मेरे अपने हो। अब मुझे आप सबके साथ जीना और मरना है। सचमुच, मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि मुझे आप जैसे दोस्त मिले। ईश्वर करे, हमारी यह दोस्ती हमेशा बनी रहे।