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कवि ने अपने आने को 'उल्लास' और जाने को 'आँसू बनकर बह जाना' क्यों कहा है? - Hindi (हिंदी)

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प्रश्न

कवि ने अपने आने को 'उल्लास' और जाने को 'आँसू बनकर बह जाना' क्यों कहा है?

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उत्तर

कवि बेफिक्री भरा जीवन जीने वाला व्यक्ति है। वह अपने साथियों के साथ जहाँ भी जाता है, वहाँ उनके दुख-सुख में शामिल होता है और उनमें खुशियाँ बाँटता है। वह अपने लक्ष्य अर्थात् उन लोगों की खुशियों को स्थायी नहीं बना पाता है। वापस आते समय कवि और वे लोग दोनों ही दुखी होते हैं, इसलिए कवि ने ऐसा कहा है।

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पद्य (Poetry) (Class 8)
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अध्याय 4: दीवानों की हस्ती - कविता से [पृष्ठ २१]

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एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 3 Class 8
अध्याय 4 दीवानों की हस्ती
कविता से | Q 1 | पृष्ठ २१

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"हरी घास पर बिखरे दी हैं
ये किसने मोती की लड़ियाँ?"

ऊपर की पंक्तियों को उलट-फेर कर इस तरह भी लिखा जा सकता है–
"हरी घास पर ये मोती की लड़ियाँ किसने बिखेर दी हैं?"

इसी तरह नीचे लिखी पंक्तियों में उलट-फेर कर तुम भी उसे अपने ढंग से लिखो।

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