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कवि ने 'श्रीबज्रदूलह' किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें ससांर रूपी मंदिर दीपक क्यों कहा है? - Hindi Course - A

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प्रश्न

कवि ने 'श्रीबज्रदूलह' किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें ससांर रूपी मंदिर दीपक क्यों कहा है?

एक पंक्ति में उत्तर

उत्तर

देव जी ने 'श्रीबज्रदूलह' श्री कृष्ण भगवान के लिए प्रयुक्त किया है। देव जी के अनुसार श्री कृष्ण उस प्रकाशमान दीपक की भाँति हैं जो अपने उजाले से संसार रुपी मंदिर का अंधकार दूर कर देते हैं। अर्थात् उनकी सौंदर्य की अनुपम छटा सारे संसार को मोहित कर देती है।

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सवैया
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अध्याय 3: देव - सवैया और कवित्त - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ २३]

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एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
अध्याय 3 देव - सवैया और कवित्त
प्रश्न-अभ्यास | Q 1 | पृष्ठ २३

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पहले सवैये में से उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए जिनमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है?


निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

पाँयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।

साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई


श्री कृष्ण का शरीर कैसा है? उसका सौंदर्य किस कारण बढ़ गया है?


श्रीकृष्ण के मुख की तुलना किससे की गई है और क्यों?


श्रीकृष्ण की तुलना किससे की गई है और क्यों?


प्रथम सवैये के आधार पर बताइए कि प्राण पहले कैसे पल रहे थे और अब क्यों दुखी हैं?


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
तब तौ छबि पीवत जीवत हे, अब सोचन लोचन जात जरे।


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
सो घनआनंद जान अजान लौं टूक कियौ पर वाँचि न देख्यौ।


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

तब हार पहार से लागत हे, अब बीच में आन पहार परे।


संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
तब तौ छबि पीवत जीवत हे, ______ बिललात महा दुःख दोष भरे।


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